यहां लड़कियों का जन्म होने पर मनाया जाता है जश्नUpdated: Wed, 17 May 2017 10:06 AM (IST)

इस तरह से यह जनजाति पूरी तरह से लड़कियों के लिए समर्पित है।

छायाचित्र: खासी जनजाति की कन्या

वैदिक मान्यताओं के अनुसार 'कन्यादान' महादान माना गया है। मनु संहिता में भी कहा गया है, 'एक पति का धर्म है कि वह अपनी पत्नी की हर प्रकार की जरूरतों का पूरा ख्याल रखे।'

अथर्ववेद में कहा गया है, 'एक वधु, वर के लिए नदी के समान है। एक ऐसी नदी जो उसके सागर जैसे घर में जाकर अपनी पवित्रता घोलती है।' हिंदू मान्यताओं के अनुसार लड़की का जब विवाह होता है, तो वह ससुराल जाती है।

लेकिन भारत में ही मौजूद खासी जनजाति में शादी होने पर लड़कियां ससुराल नहीं जाती बल्कि लड़के ससुराल जाते हैं। क्योंकि खासी जनजाति महिला प्रधान है। यहां बच्चों का नाम मां के नाम पर होता है।

और दिलचस्प बात यह है कि यहां पर लड़कियों के पैदा होने पर बहुत जश्‍न मनाया जाता है, जबकि लड़कों के पैदा होने पर कुछ ज्यादा खुशी नहीं मनाई जाती।

लड़कियों का बचपन बहुत ही रोचक होता है क्योंकि वह गुड़िया नहीं बल्कि जानवरों की हड्डियों से खेलती हैं। और वह जानवरों की हड्डियों से ही बनीं मालाएं पहनती हैं।

खासी (या खासिया, या खासा) जनजाति के लोग भारत के मेघालय, असम तथा बांग्लादेश के कुछ क्षेत्रों में निवास करते हैं। इस तरह से यह जनजाति पूरी तरह से लड़कियों के लिए समर्पित है।

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