हनुमानजी हमेशा रहते हैं ऐसे लोगों के साथUpdated: Mon, 13 Jul 2015 05:02 PM (IST)

कलियुग में हनुमानजी का वास है। यह हमारी आस्था और विश्वास है।

कलियुग में हनुमानजी का वास है। यह हमारी आस्था और विश्वास है। हममें से किसी ने हनुमानजी को नहीं देखा, वर्तमान समय में जो कहते हैं जिन्होंने साक्षात् बजरंगबली के दर्शन किए हैं, उनके पास भी कोई प्रमाण नहीं।

हनुमानजी हर समय, हमारे आसपास हैं। हमें देख रहे हैं। सत्य बोलेने वाले, ईमानदार और नेकी पर चलने वाले परोपकारी लोगों की पुकार अवश्य सुनते हैं।

लेकिन, कहते हैं कलियुग में सर्वप्रथम हनुमानजी ने भगवान श्रीराम की कथा पर आधारित पवित्र ग्रंथ 'श्रीरामचरितमानस' के रचियता गोस्वामी तुलसीदास को दर्शन दिए।

पढ़ें: जब हंस पड़े लक्ष्मण...!

इसका प्रमाण है कि तुलसीदासजी ने स्वयं अपने ग्रंथों में इस बात का उल्लेख किया है। वह लिखते हैं कि 'चित्रकूट के घाट पे, भई संतन के भीड़। तुलसीदास चंदन घिसें, तिलक देत रघुबीर।' ये शब्द स्वयं प्रभु हनुमानजी ने तुलसी दास से कहे थे।

हम सभी जानते हैं कि हनुमानजी का जन्म त्रेतायुग में हुआ था। वह श्रीराम के अमिट भक्त हैं। उन्होंने त्रेतायुग में वानरराज केसरी और माता अंजना के यहां जन्म लिया था। वाल्मीकि रामायण में हनुमानजी के जन्म के बारे विस्तृत वर्णन मिलता है।

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में उल्लेख मिलता है कि द्वापर युग में भी हनुमानजी उपस्थित थे। उन्होंने सर्वप्रथम भीम का अहंकार कम करने के लिए उनकी परीक्षा ली, जहां भीम को वह एक बूढ़े वानर के रूप में मिले, भीम उनकी पूंछ तक न हटा सके। हनुमानजी ने द्वापर युग में ही कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के रथ के ऊपर ध्वज में विराजमान रहे।

पढ़ें: अलग-अलग रामायण में जटायु की महिमा

वर्तमान समय में कहा जाता है कि जहां-जहां रामायण कथा का वाचन सच्ची श्रद्धा, आस्था और पूरे विधि-विधान से होता है वहां हनुमाजी जरूर आते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं से उल्लेख मिलता है कि हनुमानजी कलयुग के अंत तक पृथ्वी पर रहेंगे।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.