हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म जिसमें किया गया पहला डबल रोलUpdated: Thu, 13 Jul 2017 10:06 AM (IST)

वह सिर्फ रामायण, महाभारत और पुराणों की कहानियों को प्रवचन में ही सुना करते थे।

भारतीय सिनेमा की शुरुआत धार्मिक फिल्मों से हुई। यह वह दौर था, जब सिनेमा के बारे में लोग बहुत कम जानते थे। वह सिर्फ रामायण, महाभारत और पुराणों की कहानियों को प्रवचन में ही सुना करते थे।

लेकिन जल्द ही उन्होंने इन कहानियों को जब चलचित्र पर देखा तो वो हैरान हो गए। और इस तरह एक के बाद एक धार्मिक फिल्मों का सिलसिला रुपहले पर्दे पर चलता रहा।

सिने जगत की पहली फिल्म थी राजा हरिश्चंद्र, इसका निर्माण दादा साहब फाल्के ने किया था। जोकि एक मूक फिल्म थी। फिल्म 03 मई 1913 को रिलीज हुई। दरअसल, इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा दादा साहब फाल्के को क्रिसमस पर मिली थी।

हुआ यूं था कि विदेश दौरे पर क्रिसमस के दौरान उन्होंने ईसा मसीह पर बनी एक फिल्म देखी। फिल्म देखने के दौरान ही फालके ने निर्णय कर लिया कि वह भारत आकर फिल्म बनाएंगे। रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक महाकाव्यों से फिल्मों के लिए अच्छी कहानियां भारत में मौजूद ही थीं।

इस तरह मूक फिल्मों का दौर चल पड़ा। इसी दौरान पारसी थियेटर अपने चरम पर था। इसमें धार्मिक और कहानियों पर आधारित चलचित्र बनाए गए।

फिल्म राजा हरिश्चंद्र के बाद दादा साहब फाल्के की फिल्म कंपनी के बैनर ने सन् 1913 में मोहिनी भस्मासुर का निर्माण किया। इसी फिल्म के जरिए कमला गोखले और उनकी मां दुर्गा गोखले जैसी अभिनेत्रियों को भारतीय फिल्म जगत में पहचान मिली। दादा फाल्के ने आगे चलकर राजा हरिश्रचंद्र, मोहिनी भस्मासुर और सत्यवान सावित्री को लंदन मे दिखाया ।

सन् 1917, दादा फाल्के की फिल्म लंका दहन रिलीज हुई। यह एक ऐसी पहली फिल्म थी जिसमें किसी कलाकार ने पहली बार डबल रोल निभाया था। अन्ना सांलुके ने इस फिल्म में राम और सीता का किरदार निभाया। उस समय बंबई के एक सिनेमा हॉल मे लंका दहन फिल्म को 23 सप्ताह तक लगातार दिखाया गया।

इसके बाद सन् 1919 में दादा फाल्के ने कालिया मर्दन नाम की फिल्म बनाई। इसमें उनकी बेटी मंदाकिनी फाल्के ने कृष्णा का किरदार निभाया था। लंका दहन और कालिया मर्दन के दौरान भगवान राम और कृष्ण जब पर्दे पर आते तो सारे दर्शक उन्‍हें दंडवत प्रणाम करने लगते थे।

इसी दौरान 1920 मे आर्देशिर इरानी ने अपनी पहली मूक फिल्म नल दमयंती का निर्माण किया। फिल्म में पेटनीस कूपर ने मुख्य भूमिका निभाई, और इस तरह मूक फिल्मों से बोलती फिल्मों का दौर शुरु हो गया। लेकिन हिंदी सिनेमा की धार्मिक फिल्मों में जो प्रसिद्धि जय संतोषी मां फिल्म ने पाई, वह अपने आप में एक मिसाल है। निर्देशक विजय शर्मा की यह फिल्म 30, मई 1975 को रिलीज हुई।

इस फिल्म ने उस समय बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। यह फिल्म उस समय रिलीज हुई जब देश में माहौल काफी गर्म हो रहा था। देश में आपातकाल लगने के बाद भी फिल्म का कारोबार नहीं थमा और फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई।

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