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भूटान है दुनिया का खुशनुमा देश, लेकिन क्यों? यहां जानेंUpdated: Mon, 20 Mar 2017 03:12 PM (IST)

लोग संतुष्ट हैं और इसी कारण वे खुश भी हैं। वहां खुशी सबसे ऊपर है।

वर्ल्ड हैप्पीनेस-डे 20 मार्च विशेष...

मध्यप्रदेश सरकार भूटान से खुशी का फार्मूला तलाश रही है। जिंदगी जीने के खुशनुमा तरीके अपना कर इस छोटे से देश ने कई बड़े देशों को चकित किया है। जीने के उसके ढंग को देख दुनिया दंग और अचंभित है। आखिर क्या है इस देश की खुशी का राज ।

दरअसल, दक्षिण-पूर्व एशिया में भूटान बहुत छोटा-सा देश है लेकिन इसकी ख्याति इस कारण है कि यह खुशनुमा देश है। 'ग्रॉसनेशनल हैप्पीनेस' का मंत्र भी यहीं से दुनिया को मिला। 'ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्शन' यानी जीडीपी के पीछे दौड़ती दुनिया को भूटान ने याद दिलाया कि असल चीज तो खुशी है।

आखिर क्या वजह है कि इस छोटे से देश में लोग खुशी से रहते हैं। पश्चिमी देशों के अनेक लोग इस रहस्य को खोजते हुए यहां आए और अचंभित हुए। अमेरिका में रहने वाली लिंडा लेमिंग नब्बे के दशक में कॉलेज पूरा करने के बाद भूटान पहुंची थीं और चकित रह गईं।

इस देश की जीवन शैली से प्रभावित होकर उन्होंने 'मैरिडटू भूटान' पुस्तक लिखी और अब उनकी दूसरी किताब 'अ फील्ड गाइड टू हैप्पीनेस' आई है। इन दोनों किताबों के सहारे उन्होंने भूटान के लोगों की खुशी का रहस्य उजागर किया है।

कहते हैं कि यहां हर सप्ताह लोगों को औसतन 3 ही काम करने होते हैं जबकि पश्चिमी देशों में नाश्ते और लंच के बीच में ही लोगों को इतने काम पूरे करने होते हैं। भूटान के नागरिक जिंदगी को बहुत इत्मीनान और भरपूर तरीके से जीते हैं और इसलिए वे खुश हैं।

खुशी उनके भीतर है बाहर नहीं। तो जानते हैं वे बातें जो भूटान के निवासियों की खुशी बन जाती हैं।

आध्यात्मिक खुशी अहम

दुनिया के दूसरे देशों में भौतिक वस्तुओं को ही खुशी का पैमाना माना जाता है। अगर किसी के पास आधुनिक टेक्नोलॉजी वाला फोन नहीं है या उसकी हैसियत वह फोन खरीदने की नहीं है तो वह दुख महसूस करता है।

भूटान में लोग भौतिकता के साथ ही साथ अपनी आध्यात्मिक उपलब्धि का भी ख्याल करते हैं। वे इस बात की परवाह कम ही करते हैं कि उनके पास भौतिक संसाधन कितने हैं लेकिन इस बात के बारे में ज्यादा सोचते हैं कि वे कितने खुश हैं।

तेजी से बढ़ती जीडीपी

जब लोग तरक्की करते हैं तो वे खुश रहते हैं। पिछले कई वर्षों से भूटान की जीडीपी नियमित गति से आगे बढ़ रही है। बहुत ऊंची छलांग लगाने के बजाय उन्होंने तरक्की की गति को कायम रखा है। कुछ समय पहले ही भारत को अपने यहां हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट में निवेश का न्योता देकर भूटान ने अच्छा निवेश पाया। यहां लोग संसाधनों की ठीक से संभाल करते हैं और इसलिए वे खुश रहते हैं। यहां लोगों में संसाधनों का दोहन करने का लालच नहीं है। जितना हासिल है उसी में खुश रहना मंत्र है।

टीवी व इंटरनेट से बेफिक्र

टीवी पर हम सारा दिन यही देखते हैं कि लोग किस तरह ज्यादा से ज्यादा कमाई कर रहे हैं। वे किस तरह मजे का जीवन जी रहे हैं और इस तरह हमारे भीतर ईर्ष्या और गुस्सा पनपता है। इंटरनेट भी कमोबेश यही काम करता है। वहां ट्रॉल्स हैं और लगातार ऐसी चीजें हैं जो हमें चिढ़ाती हैं। हम सोशल मीडिया पर लगातार उपस्थित रहना चाहते हैं और वहां हमारी पूछ परख नहीं होने पर हताश होते हैं। भूटान के लोग इन सभी चीजों की परवाह नहीं करते हैं और ज्यादा खुश रहते हैं। वे टीवी और इंटरनेट की परवाह नहीं करते हैं।

मृत्यु के विचार से खुशी

बीबीसी में प्रकाशित इरिक वेनर के यात्रा संस्मरण में जिक्र आता है कि भूटान में लोग हर दिन चार-पांच बार मृत्यु के बारे में सोचते हैं। और किसी देश के लोग मृत्यु के बारे में इतना ज्यादा नहीं सोचते हैं। लेकिन इसका खुशी से गहरा संबंध है।

हालिया अध्ययन बताते हैं कि मृत्यु का विचार यहां सकारात्मक ढंग से लिया जाता है। यहां केलोग सोचते हैं कि मृत्यु तो आना ही है तो जितना भी जीवन जी रहे हैं उसे सकारात्मक ढंग से जिया जाए।

बुद्धशिक्षा का प्रभाव

बौद्ध धर्म दुनिया का सबसे शांत और खुशी देने वाला धर्म है। इस धर्म को मानने वाले कर्म में विश्वास करते हैं। बौद्ध धर्म का मानना है कि जो लोग अच्छी जिंदगी जीते हैं वे ज्ञान प्राप्त करने के करीब रहते हैं और जब उनका पुनर्जन्म होता है तो वे अच्छे जीवों के रूप में जन्म लेते हैं। यह विचार उन्हें अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करता है। एक दूसरे से मिलकर रहने की सीख देता है। जब लोग एक दूसरे को धोखा नहीं देते तो उनकी जिंदगी यूं ही खुशनुमा हो जाती है।

ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस का विचार

यह विचार चौथे नरेश जिग्मे सिन्ग्ये वांगचुक ने दिया था। जब 1970 के दशक में वे हवानाएक क्रॉन्फ्रें से लौट रहे थे तो उनका विमान भारत में कुछ देर के लिए रुका। तब एक पत्रकार ने उनसे हिमालय में बसे भूटान की इकॉनॉमी के बारे में पूछा था और वांगचुक नजवाब दिया था, 'भूटान में हम ग्रॉस नेशनल प्रॉडक्ट के बारे में नहीं सोचते हैं बल्कि हम ग्रॉसनेशनल हैप्पीनेस का ख्याल करते हैं।' तीन दशकों बाद भी यह फिलॉसॉफी वहां बनी हुई है।

50% हिस्सा नेशनल पार्क

भूटान के नागरिकों के लिए पर्यावरण बहुत ही ज्यादा मायने रखता है। इतना अधिक कि देश का आधे से ज्यादा हिस्सा नेशनल पार्क में तब्दील है। जंगल, जानवर और पर्यावरण की रक्षा सख्ती और जिम्मेदारी के साथ की जाती है। देश का 60 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है जहां कभी वन नहीं काटे जाते। अपनी धरती और पर्यावरण की देखभाल लोगों को खुश रखती है। प्रकृति की निकटता और उसका संरक्षण भी भूटान वासियों की खुशी की बड़ी वजह है।

खुशी को आंकना

जब भी सरकार लोगों की जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव लाती है तो लोगों को यह भरोसा होता है कि सरकार उनकी खुशी का ख्याल करती है। भूटान में सरकार 'ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस' आंकती है। यहां की सरकार अपने नागरिकों की खुशी का ख्याल रखने में परफेक्ट तो नहीं है लेकिन उनके प्रयास बहुत अच्छे हैं।

यहां स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही यहां निशुल्क है। यहां ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस कमीशन है जो सरकार के निर्णयों की समीक्षा करता है कि वे जनता के हित में कितने हैं। कहते हैं कि कभी यहां राजा ने किसी गांव में स्पा प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को समर्थन दिया था लेकिन गांव वालों के विरोध के बाद कमीशन ने उस पर रोक लगा दी।

भूटान की भौगोलिक स्थिति

भूटान हिमालय में स्थित है और देश का 60 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है जहां किसी तरह का निर्माण नहीं है। ऐसी जगह पर लोग छुट्टियां बिताने जाते हैं। यहां रहना अधिक शांतिपूर्ण और प्रकृति से मिलजुल कर रहना है। यहां शहरों को कांक्रीट के जंगल में बदलने की होड़ नहीं है। 1980 के बाद से ही यहां जीने की उम्र 20 साल बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय 450 गुना।

फुर्सत के पर्याप्त लम्हे

नेशनल सर्वे के अनुसार भूटान के दो तिहाई लोग हर रात कम से कम 8 घंटे की नींद लेते हैं। यह बाकी कई देशों से बेहतर है और खासकर उद्योग आधारित विकसित देशों के मुकाबले। अच्छी नींद का असर खुशी, प्रॉडक्टिविटी और संपूर्ण स्वास्थ्य पर होता है। यहां अच्छी नींद रहन-सहन का हिस्सा है। लोग पर्याप्त आराम करते हैं। अमेरिका और अन्य देशों से आने वाले लोग यहां आकर पाते हैं कि जिंदगी में फुर्सत का क्या महत्व है और वह कितनी जरूरी है।

प्रदूषण पर काबू

पर्यावरण की चिंता करने का फायदा इस देश के नागरिकों को इस रूप में मिला है कि वे प्रदूषण रहित माहौल में रहते हैं। हालां कि यहां भी ऑटोमोबाइल्स हैं जो धुआं छोड़ते हैं। लेकिन प्रकृति में कचरा उगलने वाली फैक्ट्रियों और उद्योगों की संख्या नहीं के बराबर है। इसी वजह से हवा, पानी और धरती स्वच्छ है।

यह ऐसा देश है जिसने कभी इस बातकी चिंता नहीं की कि यह तरक्की की दौड़ में दूसरों से पीछे हैं। लोग संतुष्ट हैं और इसी कारण वे खुश भी हैं। वहां खुशी सबसे ऊपर है।

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