अयोध्या में है सुग्रीव किला, यहां होने वाला कुछ खासUpdated: Mon, 19 Jun 2017 10:12 AM (IST)

अयोध्या में सुग्रीव किला आज भी मौजूद है, जहां 20 जून 2017 के दिन सुग्रीव किला का वार्षिकोत्सव मनाया जाएगा।

अयोध्या में सुग्रीव किला आज भी मौजूद है, जहां 20 जून 2017 के दिन सुग्रीव किला का वार्षिकोत्सव मनाया जाएगा। यह किला सुग्रीव का है, जो कि किष्किंधा के राजा थे। यह मंदिर अयोध्या के चुनिंदा मंदिरों में से एक है।

एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा ने किया चिह्नित

- रामायण की कथा के अनुसार, भगवान राम जब लंका विजय कर वापस अयोध्या आए, तो उनके साथ पुष्पक विमान में अनेक बंदरों -भालुओं सहित सुग्रीव भी आए।

- भगवान ने उन्हें रहने के लिए मुक्ता और वैदूर्य मणियों से युक्त दिव्य महल दिया। सुग्रीव इसी महल यानी सुग्रीव महल में रहे थे।

- सन् 1902 में एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा ने अयोध्या के जिन पौराणिक स्थलों को चिह्नित किया, उसमें से एक सुग्रीव किला भी था।

- सुग्रीव का त्रेताकालीन दिव्य महल प्राचीन खंडहर के रूप में सिमटकर रह गया था।

विक्रमादित्य ने किला का भी जीर्णोद्धार करवाया

- संभव है करीब दो हजार साल पहले विक्रमादित्य ने अयोध्या का जीर्णोद्धार करवाते समय ग्रीव किला का भी जीर्णोद्धार कराया होगा।

- बहरहाल, 1832 में अयोध्या में भूकंप आने की सूचना मिलती है और इस भूकंप में सुग्रीव का वह प्राचीन किला ध्वस्त हो गया, जिसका जीर्णोद्धार विक्रमादित्य ने कराया था।

सुग्रीव किला या लावारिस भूत बंगला?

- एक शताब्दी तक सुग्रीव किला लावारिस भूत बंगला होकर रह गया।

- स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य साढ़े चार दशक से इस स्थल को नित्य नया मुकाम दे रहे हैं।

- स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य किला का राजकीय वैभव तो नहीं वापस ला सके पर आध्यात्मिक वैभव स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

- मंदिर में स्थापित भगवान राजराजेश्वर का नयनाभिराम विग्रह, मनोहारी मंडप, भव्य इमारत, सुविधायुक्त विशाल अतिथि गृह, अहर्निश रामज्योति एवं वेद पाठ की ध्वनि भगवान राम के प्रति सुग्रीव के स्नेह की विरासत को नया आयाम देती है।

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