भूत होते हैं या नहीं? लेकिन यहां साक्षात् देखे जा सकते हैं!Updated: Wed, 15 Mar 2017 04:43 PM (IST)

सूफी संत साबिर शाह की दरगाह उत्तराखंड के हरिद्वार में कलियार जिले के एक गांव में है।

यह बहुत दिलचस्प सवाल है कि भूत होते हैं या नहीं? यह एक लंबी बहस की विषय है। लेकिन बहस में न उलझते हुए, हम आपको भारत में मौजूद कुछ ऐसे मंदिर, दरगाह के बारे में बताते हैं, जहां भूतों को साक्षात् देखा ही नहीं, बल्कि उनका साक्षात्कार भी लिया जा सकता है।

मध्यप्रदेश : इस प्रदेश में मौजूद देवजी महाराज का मंदिर भी भूत भगाने के लिए प्रसिद्ध है। यहां जिनके ऊपर भूत-पिशाच का साया होता है। उन्हें चांदनी रात के दिन मंदिर में लाया जाता है। मंदिर के पुजारी उनके ऊपर से इन सायों को उतारने के लिए पवित्र झाडू से वार करते हैं। मान्यता के अनुसार भूतों को झाडू से डर लगता है। इसके अलावा इन लोगों के लिए कपूर जलाए जाते हैं। इस मंदिर में हर साल भूत मेला भी लगता है। यह मंदिर मप्र के बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाले मलाजपुर गांव में है।

राजस्थान: यहां स्थित बालाजी मंदिर देश का एकमात्र मंदिर है, जहां भूत भगाने का सजीव प्रसारण किया जाता है। भूत भगाने के लिए शरीर पर खौलता पानी डालते हैं और मंदिर में मौजूद खंभों पर बांधकर जिन पर भूत लगे होते हैं उसकी पिटाई करते हैं। यह मंदिर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। जो कि राजस्थान के दौसा जिला में स्थित है।

गुजरात: श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर गुजरात के सारंगपुर में स्थित है। इस मंदिर में बुरी आत्माओं से छुटकारा पाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। सभी के सामने भूत निकालने की प्रक्रिया की जाती है। मान्यता है कि यहां भूत-पिशाच से पीड़ित लोगों को इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

उत्तराखंड : सूफी संत साबिर शाह की दरगाह उत्तराखंड के हरिद्वार में कलियार जिले के एक गांव में है। यहां सबसे पहले जिसको भूत लगे हों उसे हजरत इमाम साहब की दरगाह में जाना पड़ता है जहां उसको एक लिखित शिकायत का पर्चा देना होता है इसके बाद शुरू होता है आसमानी बलाओं का इलाज।

यहां से निकलने के बाद दूसरी दरगाह किलकलि साहिब की है वहां सलाम के बाद मरीज को दो नहरों के बीच बनी दरगाह जिसको नमक वाला पीर के नाम से भी पुकारा जाता है वहां जाना पड़ता है।

यहां प्रसाद के रूप में नमक झाड़ू और कोडिय़ां चढ़ाई जाती है जिनके बाद अगर किसी को कोई एलर्जी या चमड़ी का रोग हो तुरन्त आराम होता है। यहां से निकलने के बाद चौथी दरगाह है साबरी बाग में अब्दाल साहब की दरगाह। वहां सलाम के बाद शुरू होती है किसी भी ऊपरी या पराई आफत की पिटाई।

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और एक खास चीज दुनिया में सिर्फ किलयर शरीफ ऐसी जगह है जहां जिन्नों को और भूतों को फांसी दी जाती है। फांसी के बाद इस बीमारी का अंत यहीं हो जाता है।

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