वर्ल्ड अल्झाइमर्स डे : भूलने की बीमारी से बचा सकती है स्वस्थ जीवन शैलीUpdated: Mon, 21 Sep 2015 12:19 AM (IST)

पहेलियां बूझकर, शतरंज और अन्य दिमागी खेल के साथ के स्वस्थ जीवन शैली के जरिए भूलने की बीमारी अल्झाइमर से बचा जा सकता है।

भोपाल(मध्‍यप्रदेश) । पहेलियां बूझकर, शतरंज और अन्य दिमागी खेल के साथ के स्वस्थ जीवन शैली के जरिए भूलने की बीमारी अल्झाइमर से बचा जा सकता है। इस बीमारी से बचना है तो शराब, सिगरेट और तंबाकू के सेवन भी ठीक नहीं है। बचाव ही इस बीमारी का हल है। विश्व अल्झाइमर्स दिवस के एक दिन पहले यह बात डॉ. दीपक चतुर्वेदी ने कही।

उन्होंने बताया कि हर 10 में एक व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित है। अभी जितने लोगों में इस बीमारी का पता चला है, उससे दोगुने को बीमारी है, पर उन्हें पता नहीं। शुरुआती लक्षणों को पहचान लें तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। मध्यप्रदेश में इस बीमारी के करीब 60 लाख मरीज हैं।

भूलने की बीमारी (डिमेंसिया) से ऐसे बचें

-सिल्वर के बर्तनों में बना खाना या उबले पानी का उपयोग न करें।

-तांबे के बर्तनों का उपयोग भी नहीं करना चाहिए।

-किसी न किसी रूप में हल्दी का सेवन करें, इससे दिमाग में सूजन कम होती है। याददाश्त बढ़ती है।

- शराब, सिगरेट से बचें। पूरी नींद लें।

-तनाव से बचें।

-खाने में हरी सब्जी लें। साथ ही ऐसी चीजें खाएं जिससे हर दिन शरीर को ढाई ग्राम विटामिन बी 12 और डेढ़ ग्राम विटामिन ई लें।

-डिब्बा बंद चीजें न खाएं।

-दिमागी काम के समय के ग्लुकोज की मात्रा शरीर में ज्यादा होनी चाहिए।

ये हैं लक्षण

- बहुत ही सामान्य चीजें भूल जाना।

- खाना बनाना, कपड़े पहनना आदि भूलना।

- रिश्तेदारों और दोस्तों को न पहचान पाना।

-वाहन न चला पाना

-निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगना।

- खाने खाने में कठिनाई

इस वजह से होती है बीमारी

दिमाग में करीब 10 अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जो आपस में जुड़े होते हैं। इस बीमारी में न्यूरॉन्स कमजोर हो जाते हैं। उनका आपस में जुड़ाव भी कम हो जाता है, जिससे याददाश्त कम हो जाती है। न्यूरॉन्स के कमजोर होने की वजह न्यूरो फिब्लिरली ट्रैंगल है। अल्फा अमीलाइड प्रोटीन की प्रोसेसिंग में रुकावट के चलते यह यह प्रोटीट बीटा अमीलाइड में बदल जाता है, जोकि न्यूरॉन्स के लिए टॉक्सिक (जहरीला) है।

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