दिग्‍ठान में हैं तीन स्‍वरुपों वाली मालवा की वैष्‍णो देवीUpdated: Tue, 30 Sep 2014 12:59 AM (IST)

धार से करीब 25 किमी दूर दिग्‍ठान में मालवा की वैष्‍णो देवी का 250 वर्ष पुराना मंदिर है।

धार। धार से करीब 25 किमी दूर दिग्‍ठान में मालवा की वैष्‍णो देवी का 250 वर्ष पुराना मंदिर है। संपूर्ण मालवा क्षेत्र के लोगों की तीन स्वरूपों वाली माताजी के प्रति अगाध श्रद्घा।

विशेषता : एक दिन में तीन स्वरूप। माताजी मंदिर को लेकर विशेष रूप से आस्था है। इस मंदिर में स्थापित मां काली, मां महालक्ष्मी व मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। एक ही दिन में माताजी के तीन रूप बदलते हैं। सुबह माताजी का बाल्य अवस्था वाला स्वरूप देखने को मिलता है।

जबकि दोपहर को युवा अवस्था वाला स्वरूप तथा शाम को माताजी का सौम्य स्वरूप देखने को मिलता है। मन्नात पूर्ण होने पर यहां पर भक्त आते हैं और मंदिर के पिछली दीवार पर स्वस्तिक बनाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मंदिर में एक ही शिला पर तीनों माताजी की प्रतिमाएं उकेरी हैं। सबसे अहम बात यह है कि नवरात्रि पर्व पर यहां 125 गांवों से चुनरी यात्रा आती है।

तीर्थस्थल का आकार : दिग्ठान में माताजी के इस प्रसिद्घ और प्राचीन मंदिर के कारण दिग्ठान ने धीरे-धीरे नवरात्रि में तप और तपस्या के साथ-साथ तीर्थस्थल का रूप भी धारण कर लिया है। यह बताया जाता है कि कई वर्षों पूर्व एक रजक को स्वप्न में माताजी दिखाई दी थी और तब दांगुल नदी से रजक के सपने के अनुसार प्रतिमा निकालकर उसे स्थापित किया गया था।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.