स्विट्जरलैंड की मशीन ने विदा की शेरशाह सूरी की ‘जरीब’Updated: Thu, 13 Feb 2014 09:34 AM (IST)

जिले में भूमि की नपती व सीमांकन के लिए अब स्विट्‌जरलैंड की कम्प्यूटराइज्ड टोटल स्टेशन मशीन (टीएसएम) का उपयोग किया जाएगा।

संजय राठौर, शाजापुर। जिले में भूमि की नपती व सीमांकन के लिए अब स्विट्‌जरलैंड की कम्प्यूटराइज्ड टोटल स्टेशन मशीन (टीएसएम) का उपयोग किया जाएगा। जिले के हर अनुभाग में एक-एक मशीन शासन द्वारा भेजी गई है। कुल पांच मशीनें भेजी गई हैं। हालांकि अभी तो जरीब (लोहे की चेन) का उपयोग किया जा रहा है, जो शेरशाह सूरी के काल से चला आ रहा है। कहा जाता है कि सीमांकन आदि कार्य में जरीब काफी विश्वसनीय मानी जाती है।

आरआईओ-पटवारियों को दिया प्रशिक्षण

टीएसएम से भूमि के सीमांकन आदि की प्रक्रिया तथा मशीन की खूबियों के प्रशिक्षण के लिए आरआईओ एवं पटवारियों का विगत दिनों ग्वालियर एवं उज्जैन में प्रशिक्षण हो चुका है। अब जिले के समस्त पटवारियों एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को इस मशीन के उपयोग के बारे में वहां से प्रशिक्षित होकर आए 8 पटवारियों एवं आरआईओ द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

हर अनुभाग में एक-एक मशीन

जिले के हर अनुभाग में एक-एक मशीन शासन द्वारा भेजी गई है। शीघ्र ही मास्‍टर ट्रेनरों द्वारा जिले के पटवारियों सहित अन्‍य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को मशीन के बारे में जानकारी देकर ट्रेंड किया जाएगा। आरएम त्रिपाठी, अधीक्षक भू-अभिलेख, शाजापुर

ये हैं खूबियां

  • अत्‍याधुनिक होकर यह मशीन कम्‍प्‍यूटराइज्‍ड है।
  • इसमें दूरबीन लगी हुई है।
  • इससे निकलने वाले लेजर से लगभग तीन किमी क्षेत्र में एक साथ सीमांकन किया जा सकेगा।
  • इसमें एक स्‍क्रीन लगी हुई है जिसमें नापतौल करते समय डाटा दिखाई देगा। इससे लिखा-पढ़ी और जोड़-घटाव का समय बचेगा।
  • इस मशीन से डाटा सीधे कम्‍प्‍यूटर में भी लोड़ किया जा सकेगा।
  • गीले खेत एवं खड़ी फसल वाले खेत में भी इस मशीन से सीमांकन किया जा सकेगा।
  • आड़ी-तिरछी जमीन का भी तुरंत सीमांकन आदि कार्य हो सकेगा।
  • एक ही जगह एक साथ कई सीमांकन करने की क्षमता वाली इस मशीन से इस कार्य में पांच गुना तक समय बचेगा।
  • पटवारियों को कार्य आसान हो सकेगा।

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