स्टेमसेल कम करेगी मासूमों की इंसुलिन डोजUpdated: Thu, 13 Nov 2014 03:02 AM (IST)

पीजीआई चंडीगढ़ में चल रही रिसर्च सफल हुई तो डायबिटीज पीड़ित बच्चों को दिया जाने वाला इंसुलिन डोज कम हो जाएगा।

राजीव उपाध्याय, जबलपुर। पीजीआई चंडीगढ़ में चल रही रिसर्च टाइप-1 डायबिटीज पीड़ितों (बच्चों) को राहत देने वाली है। यहां स्टेम सेल से इंसुलिन बनाने पर काम हो रहा है। रिसर्च सफल हुई तो डायबिटीज पीड़ित बच्चों को दिया जाने वाला इंसुलिन डोज कम हो जाएगा। अभी तक की रिसर्च में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यह भी हो सकता है कि स्टेम सेल प्रत्यारोपण के माध्यम से इंसुलिन का डोज ही नहीं देना पड़े।

क्या है स्टेम सेल

स्टेम सेल ऐसी कोशिकाएं हैं जिनमे शरीर के किसी अंग की कोशिकाओं को विकसित करने की क्षमता होती है। ये अन्य किसी भी प्रकार की कोशिका में बदल सकती हैं। इनका उपयोग शरीर के किसी अंग की मरम्मत के लिए किया जा सकता है।

ऐसे कम होगी डायबिटीज

टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों में स्टेम सेल को प्रत्यारोपित किया जाएगा

यह स्टेम सेल शरीर के अंदर स्वतः ही इंसुलिन की तरह डायबिटीज रोधी तत्वों का निर्माण करेगी

इस प्रक्रिया से शरीर में शुगर की मात्रा अपने आप कंट्रोल होने लगेगी

डायबिटीज कम हुई तो इंसुलिन की डोज स्वतः ही कम हो जाएगी

यह भी संभव है कि ऐसे इलाज से बच्चे को इंसुलिन की जरूरत ही नहीं पड़े

दवा भी करेगी चंगा

एक अन्य रिसर्च के अनुसार भारत में अगले एक माह एसजीएलटी-2 (सोडियम, ग्लूकोज ट्रान्सपोर्टर-2) इन्हीबिटर ग्रुप की ऐसी दवा आ सकती है, जिसके उपयोग से ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा ब्लड में न जाकर यूरिन के माध्यम से बाहर निकल जाएगी। ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा शरीर से बाहर होने से खून में अतिरिक्त शुगर की मात्रा अपने आप घट जाएगी। हालांकि इस प्रक्रिया से किडनी में संक्रमण का अंदेशा है।

क्या है टाइप-1 व टाइप-2 डायबिटीज

टाइप-1 : यह जेनेटिक होती है। बच्चों में जन्म से ही पाई जाती है।

टाइप-2 : अनियमित खानपान से होती है। यह प्रायः युवाओं, बुजुर्गों में होती है।

- मधुमेह पीड़ितों की संख्या

-62 मिलियन डायबिटीज पीड़ित हैं देश में

-5 प्रतिशत टाइप-1 के मरीज

95 प्रतिशत टाइप-2 से पीड़ित

02 हजार बच्चे जबलपुर में डायबिटीज से पीड़ित

दवाओं का एक ग्रुप एसजीएलटी-2 इन्हीबिटर जल्द ही आ रहा है। इन दवाओं के उपयोग से किडनी से छनकर निकलने वाला ग्लूकोज वापस खून में न जाकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है। इससे टाइप-1 और टाइप-2 मधुमेह से पीड़ितों के लिए दवाओं की मात्रा और इन्सुलिन के डोज कम हो सकेंगे।

-डॉ. वीके भारद्वाज, एन्ड्रोक्राइनोलॉजिस्ट

टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में होता है। पीजीआई चंडीगढ़ में चल रही रिसर्च के अनुसार स्टेम सेल से पीड़ितों में इन्सुलिन बनने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इससे पीड़ित बच्चों को इन्सुलिन के इंजेक्शन के डोज कम हो सकेंगे या बंद हो जाएंगे। फिलहाल इस पर रिसर्च चल रही है। नई दवा एसजीएलटी-2 इन्हीबिटर मरीजों के लिए फायदेमंद है लेकिन कुछ किडनी में संक्रमण संबंधी दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

-डॉ. आशीष डेंगरा, डायबिटीज, मोटापा रोग विशेषज्ञ

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