देखें अजीबो-गरीब मंदिर, कोई गायब हो जाता है, तो कहीं लगता है भूतों का मेलाUpdated: Fri, 27 Oct 2017 12:34 PM (IST)

देश के कुछ ऐसे अनोखे मंदिर हैं, जिनके बारे में सुनकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। जानें ऐसे ही अनोखे मंदिरों के बारे में।

नई दिल्ली। मंदिर में हर कोई पूजा करने के लिए जाता है। मगर, देश के कुछ ऐसे अनोखे मंदिर हैं, जिनके बारे में सुनकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। गुजरात में भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर है, जो दिन में दो बार गायब हो जाता है। वहीं, मध्य प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जहां भूतों का मेला लगता है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ अनोखे मंदिरों के बारे में बताएंगे।

करणी माता मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के ऐतिहासिक नगर बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्तिथ करणी माता का मंदिर है, जिसे चूहों वाली माता, चूहों वाला मंदिर या मूषक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में 20 हजार चूहे रहते है और मंदिर में आने वालो भक्तो को चूहों का झूठा किया हुआ प्रसाद ही मिलता है।

चूहों को प्लेग जैसी कई भयानक बीमारियों का कारण माना जाता है। मगर, आश्चर्य की बात यह है की इतने चूहे होने के बाद भी मंदिर में बिल्कुल भी बदबू नहीं है, आज तक कोई भी बीमारी नहीं फैली है यहाँ तक की चूहों का झूठा प्रसाद खाने से कोई भी भक्त बीमार नहीं हुआ है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में दुष्ट आत्माओं से लोगों को छुटकारा मिलता है। दिव्य शक्ति से प्रेरित हनुमानजी का यह बहुत ही शक्तिशाली मंदिर माना जाता है। यहां भूत, प्रेत की बाधा और ऊपरी हवा के चक्कर से परेशान लोगों को जंजीर से बंधा और उल्टे लटके देखा जा सकता है। मंदिर में होने वाली चमत्कारिक गतिविधियों को देखकर कोई भी हैरान हो सकता है। शाम को बालाजी की आरती के दौरान भूतप्रेत से पीड़ित लोगों को जूझते देखा जाता है। कहा जाता है कि जब आप इस मंदिर से बाहर निकलें, तो पीछे पलटकर नहीं देखें।

देवजी महाराज मंदिर

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में, मलाजपुर गांव में देवजी महाराज का मंदिर है। यहां हर साल 'भूत मेला' लगता है और तब लोग अपने परिजनों की झाड़-फूंक कराने के लिए आते हैं। इसके अलावा हर महीने की पूर्णिमा को पीड़ित लोग मंदिर के आंगन में इधर-उधर भागते हैं और पुजारी झाडू मार कर इनके शरीर से बुरी आत्मा को निकालने की कोशिश करते हैं।

वेंकटेश्वर मंदिर

भगवान विष्णु का प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में स्थित है। कहते हैं कि तिरूपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति के पर लगे हुए बाल उनके वास्तविक बाल, जो हमेशा मुलायम, सुलझे और चमकदार रहते हैं। तिरूपति बालाजी के विग्रह के पिछले हिस्से में हमेशा नमी बनी रहती है। लोगों का मानना है कि इस विग्रह के पीछे से ध्यान लगाकर सुनने पर समुद्र की लहरों की आवाज आती है। ऐसा क्यों होता है, यह किसी आज तक ज्ञात नहीं हो पाया है।

बालाजी के विग्रह पर 'पचाई कर्पूरम' चढ़ाने की परंपरा है। यह कपूर से मिलकर बना एक विशेष आलेप है। कहते हैं अगर इस आलेप को किसी साधारण पत्थर पर चढाया जाता है, वो पत्थर कुछ ही देर में चटक जाता, लेकिन काले पत्थर से बनी तिरूपति बालाजी के विग्रह आजतक इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। यहां लोग अपने बाल दान करते हैं।

स्तंभेश्वर महादेव

गुजरात के भरुच जिले की जम्बूसर तहसील में एक गांव है कावी। यह खंभात की खाड़ी के सामने की ओर है। समुद्र के किनारे स्थित इस गांव में स्तंभेश्वर महादेव का मंदिर है यह दिन में दो बार गायब हो जाता है। दरअसल, समुद्र के इस किनारे पर दो बार ज्वार आता है और तब समुद्र का पानी भोलेबाबा का अभिषेक करते हुए मंदिर को गायब कर देता है। भाटे के समय पानी धीरे-धीरे उतरता है और मंदिर फिर से दिखने लगता है। लोक मान्यता है कि स्तंभेश्वर मंदिर में स्वयं शिवशंभु विराजे हैं, इसलिए समुद्र देवता खुद उनका जलाभिषेक करते हैं। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.