यौन उत्पीड़न की शिकार को थाने से कोर्ट तक मिलेगा वकीलUpdated: Sat, 18 Jul 2015 12:19 AM (IST)

ये कवायद यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राज्यों को दिए गए निर्देश के क्रम में होगी।

हरीश दिवेकर, भोपाल। यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को थाने में रिपोर्ट लिखवाने से कोर्ट में न्याय की लड़ाई लड़ने तक के लिए सरकार वकील उपलब्ध कराएगी। इस निशुल्क मदद के लिए थानों में वकीलों के पैनल की सूची लगाई जाएगी, जिसमें से कोई एक वकील पीड़िता के थाने पहुंचने पर मिली सूचना के बाद थाने आएगा और उसे रिपोर्ट दर्ज कराने में कानूनी मदद देगा।

ये कवायद यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राज्यों को दिए गए निर्देश के क्रम में की जा रही है। कोर्ट ने समिति गठित करने से लेकर कड़े कदम उठाने तक के निर्देश दिए हैं। योजना सफल रही तो मप्र पहला राज्य होगा, जहां थाने से कोर्ट तक पीड़िता को कानूनी मदद मिलेगी। गृह विभाग अपर मुख्य सचिव बीपी सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रालय में हुई बैठक में इस योजना को तैयार करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास और विधि विभाग के अध्‍ािकारी शामिल थे। अपर मुख्य सचिव सिंह ने अफसरों से कहा है कि वे पीड़ित महिलाओं के लिए चलाई जाने वाली योजना का पूरा ब्योरा सात दिन में दें, जिससे नई योजना को शुरू किया जा सके। वर्तमान में पीड़ित महिलाओं के लिए स्वास्थ्य महकमा गौरवी, महिला एवं बाल विकास ऊषा किरण और विधि विभाग कानूनी सहायता देने जैसी योजना चला रहा है। सरकार का मानना है कि इन तीनों योजनाओं को एक कर हर थाने में 10-10 वकीलों का पैनल बनाकर उसे ऑन स्पॉट कानूनी सहायता दी जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेशभर में 900 थाने हैं। ऐसे में 9 हजार वकीलों को राज्य सरकार अपने साथ जोड़ेगी।

इसलिए पड़ी जरूरत

- स्वास्थ्य महकमा यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए गौरवी योजना चला रहा है। इसमें पीड़िता को गौरवी कैन्द्र पर आना होता है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में कई महिलाएं यहां तक नहीं पहुंचतीं। वहीं दूर-दराज क्षेत्र में घटना होने पर महिलाएं यहां आने के बजाय थाने पर चली जातीं हैं।

- विधि विभाग विधिक सहायता देने की योजना चला रहा है, लेकिन इसके लिए पीड़िता को विभाग में आकर आवेदन देना होता है। पूरी प्रक्रिया की भी जानकारी न होने से कम पीड़िताएं ही यहां तक पहुंच पातीं हैं।

- महिला एवं बाल विकास विभाग घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास और संरक्षण के लिए ऊषा किरण योजना चला रही है। अधिकांश महिलाओं को इसकी जानकारी नहीं होने से इसका उपयोग नहीं हो पाता।

- इन सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार तीनों योजनाओं को एक कर पीड़िता को पुलिस थाने में ही न्यायिक सहायता उपलब्‍ध कराने जा रही है। कारण कि महिला के साथ अपराध गठित होने के बाद वे सीधे थाने पहुंचती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश में दूरस्थ क्षेत्रों में भी पुलिस थाने हैं, ऐसे में इसका लाभ पीड़िता को शत-प्रतिशत मिल सकेगा।

सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में बनी हैं समितियां

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोकने लिए आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया है। मंत्रालय में पंचायत विभाग की अपर मुख्य सचिव अरूणा शर्मा की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित है। हाल ही में पन्‍ना के तत्कालीन कलेक्टर आरके मिश्रा के खिलाफ थाने में केन्द्रीय विद्याालय की प्राचार्या द्वारा यौन शोषण का मामला दर्ज कराने पर यह कमेटी जांच करने पन्‍ना भी गई थी।

- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए यह नई योजना बनाई जा रही है। इस बैठक में इसकी सहमति बन चुकी है जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।

-डीपी गुप्ता, सचिव, गृह विभाग

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