सरदार सरोवर बांध परियोजना : डूबने से बचे, सुविधाओं को मोहताजUpdated: Wed, 10 Dec 2014 03:34 AM (IST)

सरदार सरोवर बांध परियोजना के नवीन डूब क्षेत्र की घोषणा हुए लगभग 6 वर्ष हो चुके हैं।

विवेक पाराशर, बड़वानी। सरदार सरोवर बांध परियोजना के नवीन डूब क्षेत्र की घोषणा हुए लगभग 6 वर्ष हो चुके हैं। इसके तहत प्रदेश के 4 जिलों के 193 गांवों को डूब क्षेत्र से बाहर कर दिया गया है जबकि अब तक गजट अधिसूचना में इसे न लिए जाने से असमंजस की स्थिति निर्मित है।

धारा 4 के तहत डूब में लिए गए इन गांवों में जहां विकास कार्यों पर रोक लगी है, वहीं अन्य कई योजनाओं व ग्रामीणों द्वारा स्वयं के निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। इन 193 गांवों के लोग डूबने से तो बच गई हैं, लेकिन कानूनन अब तक सुविधाओं से मोहताज हैं।

मामले को लेकर मंडवाड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता बाबूलाल काग ने प्रदेश शासन के मुख्य सचिव से लगाकर चार जिलों के कलेक्टर व कार्यपालन यंत्री एनवीडीए को आवेदन सौंपा है। श्री काग ने बताया कि नवीन बेक वॉटर लेबल के आधार पर इन गांवों को धारा 48 के तहत विधिवत बाहर किया जाना था।

बावजूद इसके अब तक सिर्फ मौखिक रूप से ही डूब क्षेत्र से बाहर बताया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है वहीं कई व्यवहारिक मामलों विसंगतियां सामने आ रही हैं।

महाराष्ट्र व गुजरात के गांव भी हुए हैं बाहर

नवीन बेक वॉटर लेबल के आधार पर मप्र के 193 गांव सहित गुजरात व महाराष्ट्र के गांव भी डूब क्षेत्र से बाहर हुए हैं। इसके तहत गुजरात के 14 और महाराष्ट्र के 33 गांव शामिल हैं। वहीं प्रदेश के बड़वानी सहित आलीराजपुर, धार व खरगोन जिले के 193 गांव शामिल हैं। नवीन बेक वॉटर लेबल 4 अगस्त 2008 को निर्धारित किया गया था।

निदेशक ने आयुक्त को दिए निर्देश

श्री काग द्वारा शिकायत किए जाने के बाद नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के निदेशक डॉ. अफरोज अहमद ने आयुक्त नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को पत्र जारी किया है। 28 नवंबर को जारी पत्र में 45 दिन के अंदर संबंधित गांवों में अप्रभावित मकानों व भूमियों के लिए की गई भू-अर्जन की प्रक्रिया को वापस लेने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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