लाल किले में शाहजहां के सिंहासन को मिलेगा मुगलकालीन लुकUpdated: Mon, 05 Jan 2015 10:41 AM (IST)

लाल किले के दीवान ए आम में स्थित शाहजहां के सिंहासन को अब मुगलकालीन लुक मिलेगा।

विजयालक्ष्मी, नई दिल्ली। लाल किले के दीवान ए आम में स्थित शाहजहां के सिंहासन को अब मुगलकालीन लुक मिलेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सिंहासन को मुगल लुक देने के लिए इसके चारों ओर वेलवेट का पर्दा लगाने की योजना बनाई है। सिंहासन के चारों ओर शीशा भी लगाया जा रहा है। इस काम के खत्म होने के बाद मुगलकाल में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक वेलवेट का पर्दा लगाया जाएगा।

मालूम हो कि दीवान ए आम में मौजूद सिंहासन के संगमरमर को प्रदूषण से खतरा है जिससे इसके बदरंग होने की संभावना बढ़ गई थी। लिहाजा एएसआई ने इसके चारों ओर शीशा लगाने का काम शुरू किया ताकि लोग इसे देख सकें।

एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. बी आर मणि ने बताया कि सिंहासन बहुत मूल्यवान पत्थरों से बना है। इसे पॉलिथिन से ढंका गया था लेकिन हवा और पंछियों के कारण इसको नुकसान पहुंच रहा था। लिहाजा इसके चारों ओर शीशा लगाने का काम आखिरी चरण में है। यहां आने वाले लोग इसे मुगलकालीन लुक में देख सकेंगे ।

क्या है इतिहास

दीवान ए आम वह स्थान है जहां पर शाहजहां की अदालत लगा करती थी। शाहजहां के बैठने के लिए दीवान ए आम में संगमरमर पत्थर का सिंहासन बनाया गया था। उसी सिंहासन पर बैठ कर शाहजहां दरबार लगाया करता था। इस राज सिंहासन को लाल किला के निर्माण के समय 1648 में बनवाया गया था।

सिंहासन के पीछे की ओर संगमरमर की एक छतरी है। इस छतरी के छत में खूबसूरत पत्थरों की नक्काशी है। कहा जाता है कि अंग्रेज इस छतरी को निकाल कर लंदन ले गए थे लेकिन लॉर्ड कर्जन के आग्रह पर सन 1903 में इसे वापस लाकर इसी राज सिंहासन के ऊपर लगा दिया गया।

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