राम मंदिर : विवाद वहीं, बदल गए सुर, सियासत जारीUpdated: Fri, 05 Dec 2014 08:58 AM (IST)

06 दिसंबर की तारीख नजदीक आते ही एक बार फिर राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मसले चर्चा में है।

06 दिसंबर की तारीख नजदीक आते ही एक बार फिर राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मसले चर्चा में है। इस बार राम मंदिर नहीं, अंबेडकर को याद करने के भाजपा के फैसले से स्पष्ट संकेत हैं कि सत्ता में आने के बाद उसका रुख बदला है। और भी लोगों के रुख बदले हैं, लेकिन यह भी सच है कि विवाद वहीं का वहीं है और सियासत भी जारी है।

बरसों से अयोध्या में बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी ने साफ कर दिया है कि वे इस मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने रामलला के मंदिर पर दोनों पक्षों की ओर से हो रही सियासत की कड़ी निंदा की है। यही नहीं, देश तथा विदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम की प्रशंसा भी कर डाली। साथ ही सपा और कांग्रेस के रुख को सुविधा और सत्ता की सियासत बताया।

हाशिम अंसारी ने कहा कि अब मैं मुकदमे की पैरवी नहीं करूंगा। मैं तो रामलला को आजाद देखना चाहता हूं। रामलला तिरपाल में रहें और उनके नाम पर सियासत करने वाले महलों में यह ठीक नहीं है। मंदिर तथा मस्जिद के नाम पर सब अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। मैं छह दिसंबर को यौम-ए-गम में शामिल नहीं होऊंगा।

वहीं छह दिसंबर से पूर्व भाजपा का यह फैसला भी काफी मायने रखता है, जिसमें उसने बाबरी विध्वंस की बरसी पर डॉ. बीआर अंबेडकर को याद करने और दलित बस्तियों में सदस्यता अभियान चलाने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र में सरकार बनाने के बाद भाजपा ने राममंदिर मुद्दे पर अपना नजरिया बदला है।

भाजपा अब छह दिसंबर को राममंदिर निर्माण की रट नहीं लगाएगी, वरन संगठन विस्तार के लिए दलित-प्रेम का इजहार करेगी और बाबा साहब डॉ. अंबेडकर का महानिर्वाण दिवस मनाएगी। भाजपा ही नहीं, शिवसेना भी इस वर्ष विजय दिवस न मनाकर राममंदिर को भव्यता देने का संकल्प लेगी। विश्व हिदू परिषद व बजरंग दल इस बार शौर्य दिवस न मनाकर जिलों में हिंदू सम्मेलनों पर ही ध्यान लगाए हुए हैं।

उसी दिन श्रीनगर में मोदी की रैली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 दिसंबर को श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करेंगे। उनका 6 दिसंबर को घाटी में जाना काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उसी दिन बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी। तब इस घटना के बाद समूचे कश्मीर में भी साम्प्रदायिक तनाव फैल गया था। माना जा रहा है कि मोदी श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में होने वाली इस रैली में विभिन्न धर्मों के मानने वालों के बीच प्रेम और भाईचारे के संबंध बनाने पर जोर देंगे।

अयोध्या में साथ बन जाएं मंदिर-मस्जिद’

सितंबर 2010 में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में हो रही देरी का विरोध किया था। बोर्ड के सचिव मौलाना अब्दुल रहीम क़ुरैशी ने कहा था, याचिका के जरिए हम अपना रुख स्पष्ट करना चाहते हैं कि अदालत का फैसला ही इस समस्या का एकमात्र समाधान हो सकता है। अदालत के बाहर इस मसले का निपटारा असंभव है।

उसी समय पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह भी कहा था कि बाबरी मस्जिद बनाम राम मंदिर मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर मस्जिद और मंदिर का निर्माण एक दूसरे के बराबर में किया जाए तो मुस्लिम समुदाय को इस पर कोई एतराज़ नहीं है। भविष्य में कोई समस्या न पैदा हो इस के लिए सरकार को मस्जिद और मंदिर के लिए अलग अलग रास्ते बनाने होंगे।

इस साल फिर शुरू हुई है पहल

अक्टूबर 2014 को भी विवाद सुलझाने की कोशिश के तहत दोनों पक्षों के धार्मिक नेताओं के बीच बातचीत की पहल हुई है। माना जा रहा है कि ताजा पहल को केंद्र सरकार में शीर्ष पर बैठे लोगों का परोक्ष समर्थन हासिल है। प्रधानमंत्री के करीबी समझे जाने वाले गुजरात के उद्यमी जफर सरेशवाला का कहना है कि बाबरी-मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद अगर बातचीत से हल किया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है और जब बातचीत होगी तो फिर अपनी पोजीशन से हटना भी पड़ता है, कुछ समझौते भी करने पड़ते हैं। विहिप राम मंदिर बनाना चाहती है और कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से यह तभी संभव होगा जब मुसलमान उस भूमि पर अपना दावा छोड़ दें।

मंदिर की सियासत सत्ता की सीढ़ी

  • 90 के दशक में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा ने मंडल आंदोलन की आग में सुलग रहे देश को कमंडल की सियासत की तरफ मोड़ दिया। इस कमंडल ने पार्टी को सत्ता के द्वार तक पहुंचा दिया।
  • 1984 में जो भाजपा लोकसभा में महज 2 सांसदों वाली पार्टी थी, 1991 में वह 120 सीट जीतकर बड़ी सियासी ताकत बन गई।
  • वोटों का ध्रुवीकरण इस कदर बढ़ा कि 1996 के आमचुनाव में पार्टी 161 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बन गई। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा तक पेश कर दिया, हालांकि 13 दिन बाद बहुमत साबित न कर पाने की वजह से अटल सरकार गिर गई।
  • अटल बिहारी वाजपेयी 1998 में फिर सत्ता में लौटे, जब 182 सीट वाली भाजपा एनडीए गठबंधन के जरिए सरकार बनाने में कामयाब हो गई। अटल सरकार 13 महीने तक सत्ता में रही।

कब क्या हुआ?

  • 1949 - भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। कथित रूप से कुछ हिंदूओं ने ये मूर्तियां वहां रखवाईं थीं। मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके ताला लगा दिया।
  • 1984 - कुछ हिंदुओं ने विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में भगवान राम के जन्म स्थल को "मुक्त" करने और वहां राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। बाद में इस अभियान का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी ने संभाल लिया।
  • 1986 - जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाजे से ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया।
  • 1989 - विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी।
  • 1992 - विश्व हिंदू परिषद, शिव सेना और भाजपा कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे जिसमें 2000 से ज्यादा लोग मारे गए।
  • मार्च, 2002 - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी और किसी को भी सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास और विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में लगभग आठ सौ कार्यकर्ताओं ने सरकारी अधिकारी को अखाड़े में शिलाएं सौंपीं।
  • अप्रैल 2003 - इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मंदिर से मिलते जुलते अवशेष मिले हैं।
  • अप्रैल 2006 - कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था और इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल और शिव सेना की 'मिलीभगत' थी।
  • मार्च 2007 - कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती। उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।
  • जून 2009 - बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी। नवंबर में रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश।
  • जुलाई, 2010 - रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी। 30 सितंबर 2010 एक ऐतिहासिक फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल को राम जन्मभूमि घोषित किया और तीन हिस्सों में बांट दिया।
  • मई 2011 - सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। कहा कि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने पर रोक रहेगी और विवादित स्थल पर सात जनवरी 1993 वाली यथास्थिति बहाल रहेगी।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.