वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड वाले पांच के सिक्के पर सवालUpdated: Sun, 30 Mar 2014 12:35 PM (IST)

श्री माता वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड वाले सिक्‍के के असली या नकली होने पर बाजार में कई सवार खडे़ हो रहे हैं।

उदय प्रताप सिंह

आई नेक्‍स्‍ट, इंदौर। आमतौर पर करारे कड़क नोट ही चर्चा में बने रहते और सिक्कों को उनकी तुलना में कम ही महत्व दिया जाता है। इन दिनों पांच रुपए के एक सिक्के की पूछपरख काफी बढ़ गई है। यह सिक्का है श्री माता वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड वाला। इस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद आम पब्लिक के मन भी इसे लेकर संदेह उत्पन्न् हो रहा है। एक रिपोर्ट...

सिक्कों में एक रुपए के बाद पांच रुपए का सिक्का ही सर्वाधिक प्रचलन में बना हुआ है। पांच रुपए के नोट के बाजार से गायब होने के कारण अब पांच रुपए के सिक्के की डिमांड काफी बढ़ गई है। खुदरा बाजार व दुकानों पर इसकी काफी मांग रहती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कुछ समय पहले जारी किए पांच रुपए के नए सिक्के पर कई सवाल खड़े हो रहे है।

वैष्‍णो देवी बोर्ड की सिल्वर जुबली पर जारी हुआ सिक्का

अभी तक बाजार में उपलब्ध पीले रंग के अशोक चक्र वाला पांच रुपए के सिक्का ही बाजार में उपलब्ध था। श्री माता वैष्‍णो देवी श्राईन बोर्ड के 25 साल पूरे होने पर लगभग नंवबर 2013 को सिल्वर जुबली के उपलक्ष में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा खास तौर पर पांच रुपए का सिक्का जारी किया। इस सिक्के में पांच का अंक व अशोक स्तंभ का चित्र एक साथ सिक्के के एक ओर है तो दूसरी ओर माता वैष्‍णो देवी का चित्र, वर्ष और देवनागरी व अंग्रेजी में माता वैष्‍णो देवी श्राईन बोर्ड अंकित है।

पांच के सामान्य सिक्के के मुकाबले आकार है छोटा

निकल ब्रास धातु से बने पीले रंग का माता वैष्‍णो देवी वाला यह सिक्का सामान्य पांच के सिक्के के मुकाबले थोड़ा छोटा है। दोनों सिक्कों का साथ में रखने पर ही यह समक्ष में आता है। इस सिक्के में 75 प्रतिशत कॉपर, 20 प्रतिशत जिंक और पांच प्रतिशत निकल धातु मिली हुई है। इसका डायमीटर 23 मिलीमीटर है और सिक्के के गोलाई में 100 दांते बने हुए है।

इंदौर में भी मिल रहे इन सिक्कों पर संदेह जता रही पब्लिक

पिछले चार-पांच महीने से यह सिक्का इंदौर के बाजार में पहुंचा है। यह सिक्का कई लोगों के पास है। पहली बार माता वैष्‍णो देवी के जारी इस सिक्के को पहली बार में कई लोग संदेह की दृष्टि से देखते है। इतना ही नहीं कुछ लोग धार्मिंक आस्‍था के चलते इस सिक्के को मंदिर व अपनी तिजौरी में भी संभालकर रख रहे हैं। बाजार में यहां तक अफवाह भी उड़ी है कि यह सिक्का नकली है।

आईनेक्स्ट ने इस अफवाह की पड़ताल की तो पाया कि 5 रुपए का यह सिक्का नकली नहीं है और इसे बकायदा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जारी किया और शहर की स्‍थानीय बैंकों द्वारा यह लोगों को दिया जा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की जीपीओ शाखा के अधिकारियों का कहना है कि उनकी ब्रांच में चार महीने पहले यह सिक्के आए थे। उसे ही वितरित किया गया है। उसके बाद से अभी तक नए पांच के सिक्के नहीं आए है। बैंक के अधिकारी भी इस सिक्के को प्रमाणिक बताते है।

500 रुपए व 12 हजार सिक्कों की मिल रही पोटली

आईनेक्स्ट को मिली जानकारी के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कुछ शाखाओं से प्रत्येक गुरुवार को सिक्कों का वितरण किया जाता है। 500 रुपए की पोटली व 12 हजार सिक्कों की पोटली में यह सिक्के बैंकों द्वारा दिए जाते है। ये सिक्के निर्धारित मूल्य पर ही ग्राहकों को दिए जाते है। इन सिक्कों के लिए सबसे ज्यादा किराना व्यापारी, खेरची दुकानदार ही बैंकों तक पहुंच रहे हैं। इन्हें सिक्के कि किल्लत ज्यादा होती है। पिछले दो-तीन महीने में माता वैष्‍णो देवी वाले पांच रुपए के सिक्के ही इन व्यापारियों के माध्यम से बाजार में आए है।

सुप्रीम कोर्ट ने सिक्के के इमेज पर उठाया सवाल

पांच रुपए के सिक्के पर धार्मिक चित्र अंकित किए जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नफीस काजी द्वारा सिक्के पर माता वैष्‍णो देवी का चित्र प्रदर्शित किए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और फाइनेंस मिनिस्ट्री के खिलाफ पीआईएल फाइल की है। उनका कहना है कि भारत में सर्व धर्म सदभाव की बात की जाती है। इस वजह से सिक्के पर किसी धार्मिक स्‍थल का चित्र नहीं होना चाहिए। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 मार्च को इस संबंध में पांच रुपए के सिक्के पर माता वैष्‍णो देवी का चित्र प्रदर्शित किए जाने पर सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद सिक्के बाजार में भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

2010 में तंजौर के बृहदेश्वर मंदिर के एक हजार वर्षों पूरे होने पर सरकार द्वारा सिक्के पर मंदिर का चित्र अंकित किया गया था। इस बात को सुप्रीम कोर्ट में भी रखा गया है। कोर्ट का कहना है कि किसी भी अवसर के 50 वर्ष या 100 वर्ष पूरे होने पर सिक्का जारी करने की जरुरत नहीं है।

...तो बाजार से वापस भी लिया जा सकता है सिक्का

5 रुपए पर माता वैष्‍णो देवी का सिक्के का चित्र अंकित होने के मुद्दा फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है। फिलहाल इसके लेन-देन में इस्तेमाल पर भी कोई रोक नहीं है। जानकारों के मुताबिक यदि सरकार इस सिक्के को जारी करने संबंध में मजबूत तर्क कोर्ट के समक्ष पेश नहीं कर पाती है तो यह संभावना भी जताई जा रही है कि इन सिक्को आरबीआई बाजार से वापस बुला ले। हालांकि कोर्ट के निर्णय के बाद इस संबंध में निर्णय हो पाएगा।

रुपए व सिक्को की कालाबाजारी

इंदौर में कई दुकानदार ऐसे भी है जो 5 रुपए, 10 रुपए के नोट व सिक्कों की कालाबाजारी करते है। मारोठिया बाजार जैसे कई इलाकों में शादी, ब्याह के मौकों पर पांच रुपए व 10 रुपए के नोट की गड्डी लेने पर भी 15 से 20 प्रतिशत अतिरिक्त पैसा चुकाना पड़ता है। इसी किराना व खेरची दुकानदारों के लिए सिक्कों की थैलियां भी 8 से 10 प्रतिशत अतिरिक्त कीमत पर मिलती है।

नकली होने पर हुआ संदेह

मैं नागदा से ट्रेन से आ रहा था। वहां पर स्‍टेशन पर पानी की बोतल खरीद तो मुझे वैष्‍णो देवी वाला 5 रुपए का सिक्का दुकानदार ने दिया। इसी तरह तिलक नगर में सांची की दुकान वाले ने भी मुझे वैसा ही सिक्का थमा दिया। पहले तो मुझे संदेह हुआ कि कही ये नकली सिक्का तो नहीं है। बाद में पता चला कि आरबीआई की ओर से ही यह जारी किया गया है।

कृष्‍णचंद्र गेहलोत, रिटायर अधीक्षक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम

बैंके ही दे रही है ये सिक्का

पांच रुपए के सिक्के की किल्लत लंबे समय से बनी हुई है। ग्राहकों को सिक्के देने के लिए बैंको से लेना पड़ता है। पिछले दो-तीन महीने से हम बैंकों से पांच रुपए के सिक्कों की जो पोटली ला रहे है। उनमें माता वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड वाले ही सिक्के ही ज्यादातर मिल रहे हैं। कुछ ग्राहक हमारे पास भी इस सिक्के पर संदेह जताते हुए पहुंचे। हमने सभी को बताया कि यह सिक्का तो बैंकों से ही दिया जा रहा है।

सुनील भाटिया, किराना व्यापारी

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