पॉलिश चावल और पैदल न चलने की आदत बढ़ा रही डाइबिटीज के मरीजUpdated: Sun, 13 Sep 2015 04:00 AM (IST)

छत्‍तीसगढ़ में डाइबिटीज (मधुमेह) पर आज तक कोई सरकारी सर्वे नहीं हुआ है, न ही भारत में।

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में डाइबिटीज (मधुमेह) पर आज तक कोई सरकारी सर्वे नहीं हुआ है, न ही भारत में। लेकिन छत्‍तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पद से रिटायर्ड डॉ. टीकाराम राठौर ने खुद डाइबिटिक मरीज होते हुए बगैर सरकारी मदद के राज्य में 150 डाइबिटिक कैंप गांव-गांव लगाए।

प्रत्येक कैंप में 150-200 लोगों का टेस्ट किया गया, जिनमें युवा सर्वाधिक थे। उनकी सर्वे रिपोर्ट खुलासा करती है कि प्रदेश के 20-22 फीसदी युवा डाइबिटीज की गिरफ्त में हैं। कारण अचानक आई समृद्धि (रईसी), पॉलिश वाला चावल और पैदल न चलने की आदत है। इससे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

'नईदुनिया' से बातचीत में डॉ. राठौर ने कहा कि अगर आज रोकथाम नहीं हुई तो कल भारत डाइबिटीज कैपिटल बन जाएगा। अभी चाइना में यह समस्या विकट है। चाइना में डाइबिटीज सर्वे हो चुका है। डॉ. राठौर की राज्य स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित गैर संचारी रोग कार्यक्रम (एनसीडी) प्रोग्राम के डाइबिटिक प्रिवेंशन प्रोग्राम में सलाह-सुझाव लिए जा रहे हैं।

गांव में सबसे ज्यादा बीमार

शहरों के साथ-साथ गांवों में भी डाइबिटीज मरीजों की संख्या बढ़ रही है, इसका कारण यह है कि गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। शहरों के लोग जागरूक हैं, इलाज करवा लेते हैं, लेकिन ग्रामीण जागरूक नहीं हैं। जब तक बीमारी का पता चलता है, देर हो जाती है।

क्या कारण

1- अचानक से आई समृद्धि- छत्तीसगढ़ में बीते कुछ सालों में अचानक से आई समृद्धि यानी लोगों के पास अचानक पैसा आया और इस पैसे से लाइफ स्टाइल बदल गई। लोगों का खानपान बदल गया।

2- भूरा चावल गायब हो गया- छत्तीसगढ़ में भूरा चावल का चलन था, लेकिन धीरे-धीरे चावल के ऊपर का यह कवर जो फाइबर का था, निकाल दिया गया और इसके ऊपर पॉलिश होना शुरू हो गई। डाइबिटिक का ट्रीटमेंट ही फाइबर है, इसलिए डॉक्टर ब्राउन ब्रेड खाने को कहते हैं। गेहूं और चावल दोनों में 78 फीसदी सुगर है, लेकिन चावल का छिलका निकाल दिया जाता है, इसलिए ये हानिकारक है।

3- पैदल चलना बंद हो गया- एक समय था, जब लोग पैदल चलते थे, साइकिलिंग करते थे। लेकिन अब ये कार और सुविधायुक्त साधनों से आदतें बदल गई हैं। बॉडी वर्क नहीं हो रहा है। व्यक्ति एक मंजिल चढ़ने के लिए लिफ्ट देखता है।

क्या करें-

1- ज्यादा से ज्यादा शरीर को मूव (गतिशील रखें) करें।

2- बैठकर मोबाइल में बात न करें। बात करते-करते चलते रहें।

3- 60 मिनट से ज्यादा एक जगह पर न बैठे, एक राउंड लगा लें।

4- बस पकड़नी हो तो एक स्टॉपेज पहले उतर जाएं, दूसरे स्टॉपेज तक पैदल जाएं।

5- लिफ्ट का बिल्कुल इस्तेमाल न करें, ज्यादा से ज्यादा सीड़ियां उतरें और चढ़ें।

जागरूकता जरूरी है

मैं डाइबिटिक पेशेंट हूं। 29 साल बाद मैं 5 प्रतिशत दवा भी नहीं लेता। सर्वे कहता है कि छत्तीसगढ़ में जिस तेजी से आर्थिक स्थिति बढ़ती जा रही है या कहें रईसी बढ़ रही है, वह डाइबिटक का बड़ा कारण है। 20-22 फीसदी युवा इस बीमारी की गिरफ्त में हैं, इसलिए जागरूकता लाना जरूरी है। -डॉ. टीकाराम राठौर, रिटायर्ड सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन

चिकित्सकों को डाइबिटीज पर प्रशिक्षण

गैर संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम अंतर्गत शनिवार को 2 दिवसीय डाइबिटजी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के 27 जिलों के जिला चिकित्सालयों के चिकित्सक, विशेषज्ञ सम्मिलित हुए। राज्य सरकार जल्द मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना शुरू करने जा रही है, जिसमें 0-14 साल तक के बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन जिला अस्पतालों से दी जाएगी, इसलिए चिकित्सा-विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिलवाया जा रहा है। शासन कैंप लगाकर बच्चों की जांच करेगा, पहचान होने पर उनका पंजीयन किया जाएगा और फिर उन्हें इंसुलिन दी जाएगी। इंसुलिन का उपकरण इतना सरल होगा कि बच्चे खुद भी, कहीं पर भी इसे लगा सकेंगे।

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