परमारकालीन है बदनावर का प्राचीन एकवीरा देवी मंदिरUpdated: Mon, 29 Sep 2014 12:24 AM (IST)

एकवीरा देवी पांडवों की कुलदेवी मानी जाती है। इसके देश भर में दो ही मंदिर हैं। एक धुलिया (महाराष्ट्र) में, दूसरा बदनावर में।

धार। जिले के बदनावर में एकवीरा देवी का मंदिर परमार कालीन है। मान्‍यता है कि यहां सच्चे मन से की गई मनोकामना पूर्ण होती है।

इतिहासकार एवं पुरातत्ववेत्ता इसे परमारकालीन मानते हैं। लेकिन कुछ लोग इससे भी प्राचीन बताते हैं। एकवीरा देवी पांडवों की कुलदेवी मानी जाती है। इसके देश भर में दो ही मंदिर हैं। एक धुलिया (महाराष्ट्र) में, दूसरा बदनावर में। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

बार-बार जीर्णोद्धार के कारण मंदिर का प्राचीन स्वरूप बदल गया है। हाल ही में जनसहयोग से इसे नया बनाया गया है, लेकिन एकवीरा देवी की प्रतिमा आज भी वैसे ही है। यहां विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर के आसपास पहले शमी के वृक्ष हुआ करते थे। श्रद्घालु इनकी पत्तियां विजयादशमी की मुबारकबाद के समय एक-दूसरे को भेंट किया करते थे। लेकिन धीरे-धीरे वृक्ष समाप्त हो गए। इसलिए यह प्रथा भी बंद हो गई।

मंदिर के नाम 16.447 हेक्टेयर कृषि भूमि

मंदिर का प्रबंध, पूजा, अर्चना आदि का जिम्मा पीढ़ियों से एक ही परिवार के पास है। मंदिर के नाम पर 16.447 हेक्टेयर कृषि भूमि है। चारदिवारी से घिरे इस मंदिर में बड़ा सभा मंडप एवं बगीचा बनाया गया है। इसमें बैठकर श्रद्धालु आसानी से पूजा-अर्चना, अनुष्ठान, देवी पुराण का पाठ आदि कर सकते हैं। इन दिनों मंदिर में श्रद्घालुओं का तांता लगा हुआ है।

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