कैंसर सेल का पता बताएगी प्याजUpdated: Sat, 10 May 2014 11:33 PM (IST)

एएमयू शोधकर्ताओं ने नैनो तकनीक के जरिये प्याज में ऐसा तत्व खोज निकाला है, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने में कारगर है।

संतोष शर्मा, अलीगढ़। प्याज का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मुंह का जायका खराब हो जाता है। खाने वाले शायद ही प्याज की खासियत पहचानते हों, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी (एएमयू) के वैज्ञानिकों ने इसकी कीमत पहचान ली है। शोध टीम ने नैनो तकनीक के जरिये प्याज में ऐसा तत्व खोज निकाला है, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने में कारगर है। टीम ने अपनी विधि का पेटेंट भी करा लिया है। अब व्यापक इस्तेमाल पर प्रयोग चल रहा है।

प्याज में फाइटो मॉलीक्यूल होते हैं। इनकी कीमत को एएमयू के एप्लाइड फिजिक्स डिपार्टमेंट के तहत चल रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मैटेरियल साइंसेज (नैनो मैटेरियल्स) के वैज्ञानिकों ने पहचाना। सेंटर के प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर प्रो. आलिम एच नकवी, एप्लाइड फिजिक्स के चेयरमैन प्रो. शकील खान, डॉ. एम वसी खान व डॉ. ब्रजराज सिंह ने नैनो तकनीक के जरिये फाइटो मॉलीक्यूल में सिल्वर साल्ट मिश्रित करके सिल्वर नैनो क्लस्टर (एसएनएस) बनाने की विधि विकसित की है।

अभी तक सिल्वर नैनो क्लस्टर रसायनों के जरिये बनाए जा रहे थे। एएमयू के वैज्ञानिकों का न सिर्फ तरीका आसान है, बल्कि साइड इफेक्ट रहित भी है। शोध टीम ने सवा साल की मशक्कत के बाद यह कामयाबी हासिल की है।

खोजेगा कैंसर सेल

शोध टीम के मुताबिक सिल्वर नैनो क्लस्टर में ऑप्टिकल व फ्लोरोसेंस के विशेष गुण होते हैं। इनका द्रव रूप में इस्तेमाल करने पर शरीर में मौजूद कैंसर सेल का प्राथमिक अवस्था में ही आसानी से पता लगाया जा सकेगा। इससे एंटी बायोटिक रेजिस्टेंट व ह्यूमन कैथोजनिक माइक्रोब्स को भी कंट्रोल किया जा सकेगा।

ऐसे करेगा काम

प्याज से तैयार सिल्वर नैनो क्लस्टर पानी में घुलनशील हैं। शरीर में पहुंचते ही ये कैंसर सेल से जुड़ जाता है। शोध टीम के मुताबिक ऐसी कोशिकाओं को बायोइमेजिंग के जरिये देखा, पहचाना जा सकता है। दरअसल, एसएनएस इन कोशिकाओं को रंगीन बना देता है। चिह्नित कैंसर सेल को फोटो डायनेमिक थेरेपी से खत्म किया जा सकता है। टीम के मुताबिक सीएनसी का आकार मात्र 3000-4000 अणुओं के बराबर है।

नैनो तकनीक के जरिये तैयार तत्वों के मुकाबले सीएनसी के अत्यधिक छोटा होने से इसका हजारों गुना लाभ मिलने की संभावना है। मौजूदा थेरेपी से कैंसर सेल के अगल-बगल की कोशिकाओं को भी नुकसान होता है। लेकिन, सीएनसी के बाद फोटो डायनेमिक थेरेपी से सिर्फ वही कोशिका नष्ट होती है।

इनका कहना है

"प्याज से सिल्वर नैनो क्लस्टर बनाने में कामयाबी मिली है। पेटेंट भी करा लिया है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। कैंसर के इलाज में हमारा फार्मूला क्रांतिकारी साबित हो सकता है।"

- प्रो. आलिम एच. नकवी, प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर

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