शादी होते ही पुरुषों के नाम संग जुड़ जाता है ससुराल के गांव का नामUpdated: Thu, 04 Sep 2014 12:34 AM (IST)

माता-पिता प्यार से बच्चों का नाम रखते हैं लेकिन यहां शादी होने के बाद लोगों के नाम के साथ ससुराल का नाम जुड़ जाता है।

- विवाह के बाद अचानक बदल जाता है पुकारू नाम

- असली नाम ससुराल गांव से हो जाता है विलुप्त

अंबिकापुर(निप्र)। घर में किसी बच्चे की पैदाईश के बाद माता-पिता बड़े प्यार से बच्चों का नाम रखते हैं पर वह बच्चा बड़ा होता है और उसकी शादी जैसे ही किसी दूसरे गांव में होती है। उसका मूल नाम बदल जाता है। यह केवल पुरूषों के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भी परंपरा के तौर पर लागू होता है। सरगुजा के ग्रामीण अंचलों में जिस पुरूष की शादी जिस गांव में होती है उस गांव के नाम के साथ उसका नाम जोड़ दिया जाता है, वहीं महिला की शादी जिस गांव में भी होती है वह उसी गांव के नाम से ससुराल में जानी जाती है।

सरगुजा में अक्सर लोगों को ससुराल गांव के नाम से ही नया नाम दे दिया जाता है और वह उसके जीवित रहते तक उससे जुड़ जाता है। सरगुजा की यह परंपरा निश्चित रूप से अनोखी है और वर्तमान समय में भी पढ़े-लिखे लोगों का पुकारू नाम भी शादी होने के बाद ससुराल के नाम से चर्चित हो जाता है।

वर्षों से चली आ रही परंपरा

सरगुजा जिले में तरह-तरह की परंपराएं हैं जिसमें शादी-विवाह के बाद मूल नाम विलुप्त हो जाना भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। कई बार तो सरकारी दस्तावेजों में भी ससुराल गांव के नाम से सरगुजा के ग्रामीण चर्चित हो जाते हैं। सरगुजा जिले में बने राशन कार्डों, भारत निर्वाचन आयोग के परिचय पत्र सहित कई सरकारी दस्तावेजों में महिला व पुरूषों का नाम गांव के नाम से अंकित हो चुका है। सरगुजा की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी जारी है। ऐसा नहीं है कि केवल यह सरगुजा में ही चर्चित हो, आसपास के पड़ोसी जिलों से भी यदि शादी-विवाह होकर यहां आने वाली बहुओं का नाम यहां के लोग उसे गांव के नाम से जोड़ देते हैं।

अक्सर गांव की महिलाएं और पुरूष एक-दूसरे को ससुराल गांव के नाम से ही पुकारते हैं और धीरे-धीरे कई पीढ़ियों तक उस व्यक्ति या महिला को लोग ससुराल गांव के नाम से ही पुकारते और याद करते हैं। मसलन यदि किसी व्यक्ति की शादी ग्राम कंठी में हुई तो उसका नाम उसी दिन से कंठिहा हो जाता है। इसी तरह ग्राम परसा में जिसकी शादी होती है उसे परसापरिहा, झेराडीह में जिसकी शादी होती है उसे झेराडीहा, बकालो में जिसकी शादी होती है उसे बकोलिहा, सीतापुर में जिसकी शादी होती है उसे सीतापुरिहा के नाम से पुकारा जाता है।

घर से होती है नाम पुकारने की शुरुआत

यह तो पुरूषों के लिए नया नाम करण होता है, महिलाएं भी जिस गांव से शादी होकर आती हैं उसी गांव के नाम से उसका नाम पुकारा जाता है। मसलन कंठी से जो महिला यहां आती है,उसे कंठिहीन, बकालो से बकोलहीन, परसा से आने वाली को परसापरहीन और झेराडीह से यदि कोई शादी होकर आई है तो उसे झेराडीहीन जैसे नामों से लोग पुकारने लगते हैं। इसकी शुरूआत घर से ही होती है।

धीरे-धीरे पूरे में इसकी जानकारी हो जाती है कि अमुक महिला या पुरूष की शादी कहां से हुई है तो लोग उसके नाम से उसे पुकारने लगते हैं। सरगुजा में यह परंपरा नई नहीं वर्षों पुरानी है लोग ऐसे भी किसी की पहचान पहले गांव से ही करते हैं, बाद में उसका नाम पूछते हैं। फिर पिता का नाम पता करते हैं। संभवतः यहीं से इसकी शुरूआत हुई होगी और सरगुजा के आदिवासी अंचल में यह परंपरा शहर से लेकर गांव तक फैल चुकी है।

अब टीवी में आ रहे नाम रखने लगे

वर्तमान समय में जहां लोग टेलीविजन में प्रसारित होने वाले धारावाहिक और फिल्मों से आकर्षित हो चुके हैं और हर रोज नए-नए नाम सामने आ रहे हैं उसी के आधार पर अपने बच्चों का नामकरण भी करते हैं। बावजूद इसके शादी-विवाह होते ही वह प्यारा और सुंदर नाम विलुप्त हो जाता है। गांव में उसकी पहचान उसके मूल नाम से नहीं बल्कि ससुराल गांव के नाम से होने लगती है।

भारत वर्ष में राजा-महाराजाओं को क्षेत्र और रियासत के नाम से ही जाना-पहचाना जाता था। रामायण व महाभारत में भी कई राजा-महाराजाओं को और चर्चित पात्रों को उनके रियासत व गांव के नाम से ही पहचान मिली है। वही परंपरा लोकाचार में आ गया और सरगुजा ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ में लोगों को गांव के नाम से पुरिहा या पुरहिन जोड़कर पुकारा जाता है। किसी भी ग्रामीण के शादी-विवाह के बाद यदि उसे उसके ससुराल गांव के नाम से पुकारा जाता है तो यह प्रेम और स्नेह का भी प्रतीक है। गांव में किसी को उसके गांव के साथ पुरिहा या पुरहिन जोड़कर बुलाने में सम्मान का बोधक माना जाता है। - अनिरूद्घ नीरव, वरिष्ठ, कवि व साहित्यकार

दस्तावेजों में नाम परिवर्तन परेशानी का कारण-

गांव में जिस व्यक्ति का नाम ससुराल गांव के नाम से चर्चित हो जाता है लोग उसके मूल नाम को भी भूल जाते हैं। बोलचाल में जिस नाम का उपयोग करते हैं। सरकारी कामकाजों के दौरान दस्तावेजों में भी लोग बोलचाल में चर्चित नाम को दर्ज करा देते हैं, ऐसे में कई तरह की परेशानियां खड़ी हो जाती हैं और उस व्यक्ति का पहचान भी मुश्किल में पड़ जाता है। मूल नाम कुछ और दस्तावेजों में कुछ और नाम अंकित हो जाने से काफी परेशानी उत्पन्न हो जाती है। खासकर ऐसी त्रुटियां निर्वाचन आयोग के परिचय पत्रों में, राशन कार्डों में हो चुका है जो लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं।

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