इजरायल की 'गोल्डन आई' से देखेगी छत्तीसगढ़ पुलिसUpdated: Wed, 06 May 2015 04:00 AM (IST)

नक्सल फ्रंट पर लगातार बढ़ रही चुनौतियों के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस ने खुद को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने का फैसला किया है।

रायपुर। नक्सल फ्रंट पर लगातार बढ़ रही चुनौतियों के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस ने खुद को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने का फैसला किया है। इजरायल की एक नामी गिरामी कंपनी के प्रतिनिधियों ने पिछले सप्ताह राजधानी रायपुर का दौरा किया है और पुलिस मुख्यालय में गोल्डन आई सीरिज के बेहद संवेदी मानव रहित विमानों और अन्य उपकरणों की खरीदी को लेकर बातचीत की है । गौरतलब है कि गोल्डन आई सीरिज के यूएवी और कैमरे दुनिया के गिने चुने मुल्कों में इस्तेमाल किये जाते हैं।

जानकारी मिली है कि अब तक पैसों की कमी से बड़ी खरीदी को अंजाम देने में असफल रही छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया को केन्द्रीय गृह मंत्रालय की इजाजत भी मिल गई है माना जा रहा है कि इस खरीदी को जल्द ही अमलीजामा पहनाया जा सकता है। गौरतलब है कि नईदुनिया ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा ड्रोन खरीदने को लेकर खबर प्रकाशित की थी। गोल्डन आई सीरिज में गोल्डन आई -50 को अब तक का सर्वाधिक सफल यूएवी माना जाता रहा है।

गोल्डन आई सबसे बेहतर

छत्तीसगढ़ पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार नक्सली ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए ऐसे कैमरों की खरीदी को लेकर कवायद चल रही है जिनसे 360 डिग्री पर आसपास के इलाकों के 3डी (त्रि-आयामी) दृश्यों को देखा जा सके। इसके लिए दुनिया के टॉप रक्षा उत्पादकों से बातचीत की जा रही है।

छत्तीसगढ़ पुलिस में खरीद-फरोख्त का काम देख रहे एक अधिकारी ने बताया कि अब तक जिन कंपनियों ने इसमें रूचि दिखाई है उनसे बातचीत चल रही थी लेकिन जिन कैमरों की उपलब्धता दिखाई गई उनसे 90 डिग्री देखने में ही मदद मिल रही थी, ऐसे में गोल्डन आई निस्संदेह विशेष है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (नक्सल ऑपरेशन ) आर के विज ने इजरायल के रक्षा सौदागरों के रायपुर दौरे की बात तो स्वीकार कर रहे हैं लेकिन इस खरीदी को संवेदनशील बताते हुए और ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि सीआरपीएफ भी अब तक डीआरडीओ से ही माइक्रो ड्रोन की खरीदी कर रही है।

रोबोट्स खरीदने की कवायद

इनके अलावा छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा नक्सली इलाको में बारूदी सुरंगों से बचाव के लिए रोबोट्स की खरीदी की कवायद भी शुरू की गई है। इसके लिए छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इक्स्प्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किया गया था, जिसमें अमेरिका, फ्रांस और इजरायल की कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

गौरतलब है कि नक्सल फ्रंट पर छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए बारूदी सुरंगे एक बड़ी चुनौती रही है। नईदुनिया को जानकारी मिली है कि राज्य पुलिस जिस तरह के रोबोट्स चाह रही है उनमें 8 से 10 फीट की दूरी पर मौजूद बारूदी सुरंगों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। इस तरह के रोबोट्स का इस्तेमाल अब तक अमेरिकन आर्मी करती रही है।

धन की कमी सबसे बड़ा रोड़ा

छत्तीसगढ़ पुलिस के आधुनिकीकरण में धन की कमी एक बड़ा रोड़ा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस कुछ समय पूर्व इजरायल की एक कंपनी से एंटी माइन रोबोट्स के खरीदी को अंजाम देना चाह रही थी लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी इनकी खरीदी नहीं हो सकी। माना जाता है कि इसके पीछे धन की कमी एक बड़ी वजह रही है। क्योंकि इजरायली कंपनी ने छत्तीसगढ़ पुलिस से न्यूनतम 40 रोबोट्स खरीदने की बात कही थी जिसके बाद कंपनी छत्तीसगढ़ में ही अपना मेंटिनेंस यूनिट लगा लेती, लेकिन पर्याप्त धन न होने की वजह से यह संभव नहीं हो पाया।

सिर्फ इतना ही नहीं पोलारिस के वाहन जो जंगलों, पहाड़ों में आसानी से ले जाए जा सकते थे कि खरीदी भी परीक्षण के बाद स्थगित करनी पड़ी क्योंकि छत्तीसगढ़ पुलिस के पास उक्त वाहनों की खरीदी के लिए पर्याप्त धन नहीं था। हालांकि छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारी कहते हैं हमें ऐसे वाहनों की जरुरत नहीं है।

केंद्रीय सहायता बढ़ाने का मामला ठंडे बस्ते में

गौरतलब है कि मार्च माह में संसद की स्टेंडिंग कमेटी द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए केन्द्रीय सहायता बढ़ाने का मामला भी जोर -शोर से उठा था, छत्तीसगढ़ ने खुद भी केन्द्रीय सहायता बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन इसे अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

आश्चर्यजनक है कि 2014-15 में पुलिस और अन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1457 करोड़ के सापेक्ष 205-16 में केवल 37 करोड़ की धनराशि मुक्त की गई। यहां तक कि धन की कमी के कारण छत्तीसगढ़ को स्पेशल फोर्स के गठन का मामला भी ठन्डे बस्ते में डालना पड़ा है।

इनका कहना है

नई चीजों के हिसाब से हम खुद को अपडेट करना पड़ता है। अभी धन की कमी या उपलब्धता की बात नहीं है अभी हम उपकरणों का परीक्षण कर रहे हैं कि वो हमारे उपयोग के हैं या नहीं ।

- आर के विज, एडीजी (नक्सल सेल), छत्तीसगढ़

पुलिस को आधुनिक बनाना एक जरुरी कदम है लेकिन हमें पुलिस के प्रशिक्षण पर भी ध्यान देना होगा ।साथ ही जरुरी है कि हर संभव तरीकों से पुलिस अपना इंटेलिजेंस नेटवर्क भी बढाए ।

- कैप्टन आलोक बंसल, रक्षा विशेषज्ञ

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