इजरायली केले और ताइवानी पपीते को भा गई छत्‍तीसगढ़ की आबोहवाUpdated: Mon, 04 Aug 2014 12:59 AM (IST)

इजरायली प्रजाति के केले और ताइवानी प्रजाति के पपीते को छत्‍तीसगढ़ के नारायणपुर की आबोहवा भा गई है।

नारायणपुर। जिले में इजरायली प्रजाति के केले और ताइवानी प्रजाति के पपीते को यहां की आबोहवा भा गई है। अच्छा उत्पादन देने वाली इन प्रजातियों के फलों से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। शुरू में इसे प्रयोग के तौर पर यहां लाया गया था। तीन साल में इसका रिजल्ट आ गया। इजरायली प्रजाति के केले का उत्पादन अच्छा होने लगा है।

इसी तरह ताइवानी पपीते के पौधों की डिमाण्ड काफी हो गई। उद्यानिकी विभाग की नर्सरी में इनके पौधे तैयार किए जाते हैं और किसानों को मुफ्त में दिए जाते हैं। एक किसान को सौ पौधे तक दिए जाते हैं। इनमें केले और पपीते के अलावा कटहल, देशी आम, अमरूद, नींबू, जामुन आदि के पौधे होते हैं। बताया गया है कि एक एकड़ में इस प्रजाति के केले से किसान दो लाख रूपए तक अर्जित कर सकता है।

एक साल में इसका फलन शुरू होता है और तीन साल तक यह ज्यादा फल देता है। इसके बाद फल कम होने लगते हैं। अच्छी देखरेख नहीं होने पर भी एक एकड़ में इससे एक लाख रूपए तक की आमदनी हो सकती है। इसके बीज रायपुर के प्राइवेट लैब से बीज निगम खरीदता है और फिर इसे यहां भेजा जाता है। कुछ उन्नत किसानों का कहना है कि यदि कृषक समूह बनाकर काम करें तो इसे महानगरों में थोक में भेजा जा सकता है।

इससे आमदनी और बढ़ जाएगी। अभी बेनूर, एड़का, जम्हरी, फरसगांव, धौड़ाई, छोटे डोंगर और नारायणपुर के साप्ताहिक बाजारों में उद्यानिकी विभाग की ओर से फलदार पौधे निःशुल्क दिए जा रहे हैं। बिंजली, पालकी, पुसागांव, केरलापाल, महिमागवाड़ी, तारागांव, कुरूसनार एवं कुंदला में केले और पपीते लगाए गए हैं। इसके लिए डेढ़ सौ किसानों को ड्रिप दिए गए हैं।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.