अनिद्रा से हो सकती है डायबिटीज और उच्च रक्तचापUpdated: Thu, 17 Mar 2016 10:42 PM (IST)

तनाव से भरी जिंदगी में आज अनिद्रा एक आम समस्या बनती जा रही है।

आरती मंडलोई दुबे, इंदौर। तनाव से भरी जिंदगी में आज अनिद्रा एक आम समस्या बनती जा रही है। अधिकांश लोग इसे साधारण बात मानकर टाल देते हैं और इस समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टरी परामर्श लेते ही नहीं है, जबकि यह समस्या आगे चलकर डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है।

वर्ल्ड स्लीप डे पर एक मल्टिनेशनल इलेक्ट्रॉनिक कम्पनी द्वारा भारत में 2015-16 में मरीजों पर किए गए एक अध्ययन के दौरान यह बात सामने आई है। इसमें पता चला कि स्लीप एप्निया के 53 प्रतिशत से अधिक मरीज डायबिटीज या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं।

इस अध्ययन में सामने आया कि 14 प्रतिशत मरीज कार्डिएक समस्या से ग्रसित हैं। 84 प्रतिशत मरीजों ने माना कि उनके खर्राटों की आवाज से दूसरे लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने स्लीप एप्निया को अन्य जानलेवा बीमारियों जैसे क्रोनिक कॉर्डिएक समस्या, स्ट्रोक, न्यूरोलॉजिकल समस्या आदि में बढ़ने से पहले ही इसका उपचार कराने की जरूरत पर बल दिया। गौरतलब है कि यह अध्ययन देश के टियर 1 व टियर 2 शहरों में किया गया। ऑनलाइन हुए इस सर्वे में 1027 लोगों की प्रतिक्रिया ली गई।

यह होता है स्लीप एप्निया

नींद के अंदर सांस रुकने की बीमारी को स्लीप एप्निया कहते हैं। इसका पता लगाने के लिए पॉली सोम्नोग्राफी नामक टेस्ट किया जाता है। इस बीमारी के तीन स्तर होते हैं, जिसे एएचआई मीटर के जरिये मापा जाता है। 5-15 के बीच होने पर हलका, 15- 30 मध्यम और 30 से ज्यादा होने पर तीव्र स्लीप एप्निया होता है। इस टेस्ट में पोर्टेबल मशीन से रातभर व्यक्ति की सांसों और शरीर के हर अंग की जांच की जाती है। इसके मरीज रात में सोते वक्त बेचैन रहते हैं और दिन में भी उनींदे रहते हैं। याद रखें खर्राटे लेना इसका प्रमुख लक्षण है, इसलिए एक बार जांच जरूर करवाएं।

2025 तक होंगे 80 मिलियन मरीज

फिलिप्स हेल्थकेयर इंडिया के उदित गोयल ने कहा अनुमान है कि भारत में 2025 तक लगभग 70 से 80 मिलियन लोग डायबिटीज और उच्च रक्तचाप से पीड़ित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन मरीजों में स्लीप एप्निया लगभग 40-48 प्रतिशत है और इसका उपचार उन्हें वर्तमान स्वास्थ्य समस्याओं के नियंत्रण में मदद कर सकता है।

नींद न आना है प्राथमिक लक्षण

भारत में स्लीप एप्निया के लगभग 30-35 मिलियन मरीज हैं।इसमें दिन में नींद आना, ध्यान लगाने में परेशानी आदि शामिल हैं, जो जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इससे केवल आम जीवनशैली ही प्रभावित नहीं होती है, बल्कि क्रोनिक स्लीप डिसऑर्डर से स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

इन लोगों को होती है ज्यादा समस्या

-जो देर से सोते हैं, उनकी बायोक्लॉक बिगड़ जाती है।

-सर्दी या साइनस के कारण नोस्टेल ब्लॉकेज की समस्या होने पर।

-मोटे लोगों को।

इनका रहता है खतरा

-5.6 गुना हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।

-लकवे की संभावना 10 गुना तक बढ़ जाती है।

-थाइराइड का लेवल बिगड़ने से मोटापे की समस्या होती है।

-किडनी तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचने से वह फेल हो सकती है।

-पेंक्रियाज को ऑक्सीजन नहीं मिलने से इंसुलिन कम बनता है और डायबिटीज हो जाती है।

इस तरह होता है इलाज

-टेनिस बॉल एप्रोच में नाइट ड्रेस में पीठ पर रीढ़ की टेनिस बॉल लगा दी जाती है, जिससे मरीज करवट लेकर ही सोता है और स्लीप एप्निया की समस्या कम होती है।

-मरीज का वजन इतना कम किया जाता है कि बीएमआई 25 के आसपास आ जाए।

-गले की यूपीपीपी सर्जरी के जरिये सांस के लिए एक रास्ता बनाया जाता है।

-सबसे कारगर तरीका है सोते वक्त मरीज की नाक पर सीपेप डिवाइस लगाना। सांस रुकने पर यह मशीन ऑक्सीजन सप्लाई करना शुरू कर देती है।

क्षमता कम करती है


अपर्याप्त नींद न केवल आपकी क्षमता कम करती है, बल्कि जीवनशैली की समस्याएं भी पैदा करती है। जो लोग अच्छी नींद नहीं लेते हैं, उन्हें रक्तचाप या डायबिटीज की अधिक समस्या होती है। यह बहुत जरूरी है कि लोगों को स्लीप डिसऑर्डर पर शिक्षित किया जाए और उन्हें एक स्लीप स्पेशियलिस्ट के पास जाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि वे उचित इलाज करा सकें।

-डॉ. एसजेड जाफरी, एक्सपर्ट, स्लीप एप्निया

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