सड़क हादसे में बेटी को खोया, तो 800 बच्चियों की मां बन गई यह महिलाUpdated: Tue, 22 Aug 2017 02:34 PM (IST)

तब एक दिन उन्हें ख्याल आया कि कई ऐसी बच्चियां हैं, जिन्हें मा-बाप का प्यार नहीं मिल पा रहा है।

नई दिल्ली। करीब 40 साल पहले डॉक्टर सरोजनी अग्रवाल ने अपनी बेटी को सड़क हाससे में खो दिया था। सरोजनी बाइक चला रही थी और उनकी आठ साल की बेटी मनीषा पीछे बैठी थी, जब 1978 में हिट एंड रन का वह शिकार हो गई थीं। हासदे में सरोजनी तो बच गईं, लेकिन मनीषा की मौत हो गई थी। इसके बाद कई सालों तक सरोजनी अपनी बेटी मनीषा की याद में रोया करती थीं।

तब एक दिन उन्हें ख्याल आया कि कई ऐसी बच्चियां हैं, जिन्हें मा-बाप का प्यार नहीं मिल पा रहा है। जब उनका बड़ा बेटा इंजीनियर बन गया तो, उन्होंने मनीषा की याद में 1985 अपने किराये के घर में मनीषा मंदिर नाम का अनाथालय खोल दिया। इसके लिए लखनऊ में अपने तीन कमरों के घर को उन्होंने अनाथालय में बदल दिया और वह सारी पूंजी बच्चियों की देखभाल में लगा दी, जो उन्हें शार्ट स्टोरीज, नॉवेल लिखने के बदले में मिली थी।

आज 80 साल की डॉक्टर सरोजनी अग्रवाल पिछले 33 सालों से करीब आठ सौ से ज्यादा लड़कियों की मां बन चुकी हैं। आज उनकी कई बेटियां नौकरी कर रही हैं तो कुछ का घर बस गया है, जबकि कुछ ऐसी भी हैं जो अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।

पति वीसी अग्रवाल के साथ मिलकर वह इस नेक काम को लगातार जारी रखे हैं। कुछ लावारिस बच्चों को वह सड़क से उठाकर लाईं, तो कुछ को उन्होंने अनाथालय से आजाद कराया। उन्होंने अपने अनाथालय के बाहर एक पालना रख दिया था, ताकि जो लोग बच्चों को नहीं चाहते हो वे सड़क पर या कचरे में उन्हें न फेंके।

आज मनीषा मंदिर में पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, शिल्प कार्यशालाओं को साथ ही मनोरंजन सुविधाएं जैसे गार्डन, बास्केटबॉल, बैडमिंटन कोर्ट और टीवी रूम भी है।

अग्रवाल दंपत्ति का मनाना है कि शिक्षा ही सफलता की कुंजी है, लिहाजा बच्चियों के पर्याप्त बड़े हो जाने पर वे उन्हें उच्च शिक्षा के लिए देश के नामी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए भेज देती हैं।

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