युवाओं में हेयर फॉल की समस्‍या का मिला सॉल्यूशनUpdated: Sat, 04 Jul 2015 07:40 AM (IST)

शहरी के युवाओं के लिए हेयर फॉल होना सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।

ग्वालियर(मध्‍यप्रदेश)। शहरी के युवाओं के लिए हेयर फॉल होना सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। डॉक्टर्स इसे बदली हुई लाईफस्टाल के साथ हेयर की केयर न करना भी बता रहे हैं। वे कहते हैं कि लगभग 10 वर्ष पहले 30 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति उनके पास इस समस्या को लेकर पहुंचते थे, लेकिन हर माह लगभग 55 प्रतिशत युवा संपर्क में बने हुए हैं। फिर भी जो युवा हेयर फॉल होने से अपनी खूबसूरती गवां चुके हैं, वे नई तकनीक की मदद से एक बार फिर खूबसूरती पा सकते हैं। इसे सर्जिकल और नॉनसर्जिकल नाम दिया गया है।

इसकी वजह सिर्फ बढ़ता हुआ प्रदूषण है, क्योंकि सबसे ज्यादा घर से बाहर वक्त बिताने वाले युवा वर्ग कि सिर में पहुंचकर हेयर्स की रूट पर लेयर बना रहा है। यह सेल्स को उम्र पूरी होने से मार रहा है, इसी वजह से हेयर फॉल की समस्या बढ़ रही है। डॉक्टर्स कहते हैं कि इस लेयर को सिर्फ शाम या रात के समय शेम्पू या साबुन से हेयर वॉश कर ही हटाया जा सकता है।

चार वजह हेयर फॉल की

1-वीकनेस की वजह से हेयर्स की रूट पिक्ट्रिकल की वजह से मर जाती है।

2-लगातार पॉल्यूशन में रहने से रूट्स पर एक लेयर जम जाती है, 12 घंटे से पहल अगर हेयर वॉश नहीं किए जाते तो सेल्स मरना शुरू हो जाती हैं।

3-जैनेटिक प्रॉब्लम की वजह से हेयर फॉल होते हैं, जिसे 18 डिसऑर्डर कहते हैं।

4-महिलाओं को थाइराइड की प्रॉब्लम होने से हेयर फॉल होते हैं।

डॉक्टर्स का आंकड़ा

मेल-

10 से 20 वर्ष-45%

21 से 30 वर्ष-55%

फीमेल

10 से 20 वर्ष-30%

21 से 30 वर्ष-70%

यह मिला ऑप्शन

नॉन सर्जिकल ट्रांसप्लांट

यह ऐसी टेक्निक है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को किसी भी दर्द का सामना नहीं करना पड़ता है। इसे चार तरीके से किए जाने वाले ट्रांसप्लांट को आधुनिग बिग भी कहा जा सकता है। क्योंकि यह केपनुमा रहता है, जिसे सिर पर चार तरह से फिट किया जा सकता है।

हेयर टैपिंग- दोनों तरफ से चिपकने वाले टेप की मदद से केप को सिर पर सेट किया जाता है।

सिलिकॉन बॉडिंग- केप को सिर पर बचे शेष हेयर के साथ धागे से अटैच किया जाता है।

सर्जिकल ट्रांसप्लांट हेयर रिप्लेसमेंट

सबसे ज्यादा रुझान युवाओं का इसी टेक्निक के प्रति है, क्योंकि सिर में हेयर को नेचुरल ग्रोथ मिलती है। इसके लिए सिर के ही हेयर्स को उस हिस्से में माइनर ऑपरेशन से लगाया जाता है, जहां की सेल्स मर चुकी हैं। ग्रोथ भी लगभग तीन से चार माह बाद मिलती है।

नैनो टेक्नोलॉजी ट्रांसप्लांट

यदि सिर के 5 से 10 फीसदी एरिया में हेयर फॉल हुआ हो तो नैनो टेक्नोलॉजी हेयर ट्रांसप्लांट ट्रीटमेंट कराया जा सकता है। लेकिन ये ज्यादा सक्सेज नहीं है, क्योंकि इसे इंडिया के साथ ग्वालियर में जन्म कुछ ही दिन पहले मिला है।

एसयूई हेयर ट्रांसप्लांट

इस टेक्निक को हाल ही में जन्म मिला है। जहां हेयर हैं उन्हें ऑपरेशन से जड़ों के साथ निकाला जाता है और खाली हिस्से में रोपा जाता है।

बड़ी प्रॉब्लम बन चुकी है

सबसे ज्यादा युवा वर्ग हेयर फॉल से जुड़ी समस्या से जूझ रहा है। जिनकी संख्या हर माह 50 से 55 प्रतिशत रह रही है। इसकी वजह लाइफस्टाइल के साथ बढ़ता पॉल्यूशन भी है। वे दोबारा खूबसूरती पाने के लिए कोई भी कीमत देने के लिए तैयार हैं। - मनोज सोनी, एक्सपर्ट

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