गणपति मंदिर के गर्भगृह में स्थित है मनोकामना देवीUpdated: Wed, 01 Oct 2014 12:25 AM (IST)

माता मनोकामना पिंडी रूप में स्थापित है। दाईं ओर भैरवनाथ की प्रतिमा है। मंदिर पूर्ण रूप से पाषाण निर्मित है।

धार। धरमपुरी की मां मनोकामना देवी श्रद्धालुओं की आस्‍था का केंद्र हैं। नगर के अति प्राचीन गणपति मंदिर के गर्भ गृह (गुफा) में यह स्थित है।

यहांमाता मनोकामना पिंडी रूप में स्थापित है। दाईं ओर भैरवनाथ की प्रतिमा है। मंदिर पूर्ण रूप से पाषाण निर्मित है, जिस पर बेहद आकर्षक नक्काशी की गई है। मंदिर में गणपति, श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, शिव, पार्वती, नंदी, हनुमान, सरस्वती व भैरवनाथ की प्रतिमा भी स्थापित है।

गर्भ गृह स्थित एक छोटे से कुंड के छिद्र में से चमत्कारिक रूप से पानी आता है। पानी आने का सिलसिला नवरात्रि तक जारी रहता है। नवरात्रि पश्चात पानी स्वतः उसी कुंडी में समा जाता है। वर्तमान में प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न है।

मंदिर की छत पर उड्यमान यक्ष की प्रतिमाएं बनी हैं। किंवदंती है कि यह मंदिर यहां उड़ कर आया था। मंदिर से जुड़े कुछ श्रद्धालुओं के साथ यहां पर चमत्कारी घटनाएं भी घट चुकी हैं। जैसे गुफा में शेर की आवाज सुनाई देना व अचानक घंटी का अपने आप बजना आदि। जैसा कि मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं व वरिष्ठ नागरिकों ने बताया।

अति प्राचीन भवानी माता खुजांवा धरमपुरी

यहां एक लाख से अधिक चंडी पाठ हो चुके हैं। प्राचीन इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1956 में किया गया।धरमपुरी के वार्ड 1 खुजांवा में कुब्जा संगम के पास जहां नर्मदा व खुज नदी का संगम होता है यह मंदिर है। मंदिर के आसपास पांडवकालीन मंदिर व परमारकालीन विशालकाय पाषाण निर्मित प्रतिमाएं स्थापित हैं। नर्मदा तट पर होने से मंदिर का विशेष महत्व है।मंदिर ध्यान, योग का श्रेष्ठ स्थान माना जाता है। 1956 से अब तक 1 लाख से अधिक बार चंडी पाठ हो चुका है।

मंदिर के पुजारी पं. प्रवीण जोशी ने बताया कि मंदिर में यक्ष बने हुए हैं। इसके आधार पर कहा जाता है कि यह मंदिर उड़ कर यहां आया था। मंदिर तीन मंजिला है, जिसके दो तल जमीन के अंदर हैं। तीसरे तल पर माता की प्रतिमा स्थापित है। भगवान राम के ससुर राजा जनक तीर्थाटन के दौरान यहां आए थे। इस मंदिर में वे 32 दिनों तक ठहरे थे व ध्यान योग किया था। शारदीय व चैत्र नवरात्रि पर प्रतिदिन यज्ञ, पूजन-अर्चन एवं आरती होती है।

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