छत्‍तीसगढ़ में आस्था से कायम है जंगल की हरियालीUpdated: Wed, 25 Mar 2015 11:25 PM (IST)

छत्‍तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में स्थित अन्‍नधरी देवी मंदिर में लोगों की इतनी आस्था है कि वे जंगल की एक टहनी तक नहीं तोड़ते।

जांजगीर-चांपा। छत्‍तीसगढ़ के बलौदा ब्लाक में अन्नधरी देवी ग्राम पहरिया में स्थापित है। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर ग्राम पहरिया में पहाड़ के ऊपर देवी विराजी हैं। मंदिर के चारों ओर हरियाली है। लोगों की देवी पर इतनी आस्था है कि वे जंगल की एक टहनी तक नहीं तोड़ते।

जंगल में अगर कोई पेड़ गिर जाए तो वह वहीं सूखकर दीमकों का ग्रास बन जाता है, मगर इसे कोई अपने घर नहीं ले जाता। देवी की कृपा से ही जंगल की हरियाली कायम है। 19 साल पहले यहां ज्योति कलश जलाने की परंपरा शुरु हुई है। अन्नधरी देवी गांव की कुल देवी है।

नवरात्रि पर्व पर हवन के लिए अग्नि प्रज्जवलित करने जंगल की सूखी लकड़ी का प्रयोग मां की पूजा-अर्चना के बाद की जाती है। चैत्र व क्वांर नवरात्रि में लोग दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं। यहां जवारा बोया जाता है तथा ज्योति कलश प्रज्जवलित की जाती है।

मंदिर के बैगा ने बताया कि यहां की प्रतिमा लगभग सौ वर्ष पुरानी है। माता की कृपा से धन धान्य में वृद्घि होती है। इसके कारण इसका नाम अन्नधरी देवी पड़ा है। यहां प्रतिवर्ष नवरात्रि पर साल में दो बार ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाते हैं और नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां नवरात्र पर व्रत रखने वाले कई श्रद्घालु खाली पैर देवी दर्शन करने पैदल आते हैं।

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