हरी झंडी का इंतजार, विलायती प्याज रोकेगा महंगाईUpdated: Sun, 20 Jul 2014 08:39 PM (IST)

महंगाई रोकने के लिए जल्दी ही विदेश से प्याज को आयात कर मंडियों में झोंके जाने की संभावना है।

सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। महंगाई रोकने के लिए जल्दी ही विदेश से प्याज को आयात कर मंडियों में झोंके जाने की संभावना है। अगले महीनों में प्याज की आपूर्ति के और खराब होने की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाते हुए आयात का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलते ही अगले कुछ सप्ताह में आयातित प्याज के घरेलू बाजार में पहुंच जाने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने अगले दो महीनों के लिए लगभग एक लाख टन प्याज के आयात का फैसला लिया है। घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें 35 रुपये प्रति किग्रा की सीमा को भी पार कर गई हैं। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और बढ़ती कीमतों पर निगरानी रखने के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की समिति में यह फैसला लिया गया है।

प्याज आयात के लिए सरकारी एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार को खंगालने के निर्देश दे दिए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से संकेत मिलने से पहले विश्व बाजार में प्याज के मूल्य और आपूर्ति में लगने वाले समय का आकलन किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि मलेशिया और इराक के प्याज के प्रतिस्पर्धी होने का अनुमान लगाया गया है। यहां से घरेलू बाजार तक प्याज की आपूर्ति भी निर्धारित अवधि में हो जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक, आयातित प्याज अगस्त के आखिरी सप्ताह तक बाजार में पहुंच जाएगा।

मानसून के कमजोर होने के चलते बारिश कम हुई है, जिससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्याज की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। खरीफ सीजन के प्याज के बाजार में आने में देरी होने की संभावना है। जबकि रबी सीजन की फसल खत्म होने के कगार पर है। जिंस बाजार के सूत्रों का कहना है कि रबी सीजन का प्याज अगले कुछ सप्ताह में चुक जाएगा।

ऐसे में अगस्त व सितंबर के दौरान प्याज के मूल्य सातवें आसमान पर पहुंच सकते हैं। केंद्र सरकार की नजर प्याज की आपूर्ति पर लगातार बनी हुई है। उसकी कोशिश है कि किसी भी हाल में प्याज की कीमतें पिछले साल के 80 से एक सौ रुपये प्रति किग्रा के उच्चतम स्तर को न छूने पाएं।

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