...तो महिला का पीछा करने वालों को कभी न मिल पाती जमानतUpdated: Tue, 08 Aug 2017 09:45 AM (IST)

वर्तमान स्थिति में महिला का पीछा करने का अपराध पहली बार करने पर "जमानत" मिल सकती है।

चंड़ीगढ़। हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला और उसके दोस्त आशीष द्वारा की गई कथित छेड़छाड़ के विरोध में आईएएस अफसर की बेटी वर्णिका न्याय के लिए खुलकर सामने आईं हैं। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए एक कानून में ढील का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। बराला को वर्णिका का पीछा करने और छेड़छाड़ करने के आरोप में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे थाने से ही बेल दे दी गई।

कारण, साल 2013 में विपक्ष ने महिला का पीछा किए जाने की घटना को गैर-जमानती अपराध बनाने के केंद्र सरकार के कदम पर रोक लगा दी थी। वर्तमान स्थिति में महिला का पीछा करने का अपराध पहली बार करने पर "जमानत" मिल सकती है। यानी अभियुक्त को जमानत लेने के लिए कोर्ट में पेश करने की जरूरत नहीं है। उसे पुलिस थाने से ही रिहा किया जा सकता है।

इसके बाद दोबारा यह गलती करने पर अपराध 'गैर-जमानती' होगा, यानी यह अधिकार सिर्फ अदालत के पास होगा कि वह आरोपी को जमानत दे या नहीं। पूर्ववर्ती यूपीए की सरकार चाहती थी कि महिलाओं का पीछा करने के अपराध को गैर-जमानती माना जाए। साल 2012 में दिल्ली में सामूहिक बलात्कार के बाद बनाई गई न्यायमूर्ति वर्मा कमेटी ने सिफारिश की थी कि इसे एक गैर-जमानती अपराध माना जाए, जिसके लिए एक से तीन साल तक जेल की सजा मिल सके।

यूपीए सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया था और स्टैंडिंग कमेटी ने भी इसे अनुमोदित कर दिया था। इसके बाद साल 2012 में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंड बिल लागू किया गया था। हालांकि, संसद में तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के इस बिल को पेश करने से ठीक पहले विपक्षी दलों समजावादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जेडी (यू) के सदस्यों ने सर्वदलीय बैठक में प्रावधान के विरोध में आवाज उठाई। उनका कहना था कि पुरुषों के खिलाफ इस कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है।

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