'डिजीटल डाइट' बिगाड़ रही है बच्‍चों की सेहतUpdated: Thu, 14 May 2015 09:14 AM (IST)

एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार टीवी, स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप, वीडियो गेम आदि के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों का माइंड सेट गड़बड़ा रहा है।

इंदौर। क्या आपका बच्चा आपकी बातों को अनसुना कर रहा है, या फिर हमेशा गुमसुम सा रहता है। या फिर छोटी-छोटी बातों को लेकर चीखता-चिल्लाता है। क्या कभी आपने उसके व्यवहार में आ रहे बदलाव की वजह जानने की कोशिश की है।

दरअसल हाल ही में आई एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार टीवी, स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप, वीडियो गेम आदि के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों का माइंड सेट गड़बड़ा रहा है और वे शारीरिक-मानसिक रूप से हिंसक प्रवृत्ति की ओर बढ़ रहे हैं।

बच्चों पर किया गया सर्वे

एसोचैम ने इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में 5 से 14 साल तक के बच्चों पर सर्वे कराया। जिसमें 82 फीसदी बच्चों के पास खुद का स्मार्टफोन, टैबलेट आईपैड है। इन गैजेट्स का वे औसत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उनमें ऐसे मानसिक बदलाव आ रहे हैं, जिसके लिए वे अभी तैयार नहीं हैं।

डिप्रेशन के शिकार

रिपोर्ट में बताया गया कि हाई टेक्नोलॉजी गैजेट्स के अधिक इस्तेमाल से बच्चों में सामाजिक अलगाव, नींद पूरी नहीं होना, मोटापा, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इसका सीधा असर उनके मानसिक स्तर पर दिखाई दे रहा है। इस बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पैरेंट्स द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से बच्चों को टेक्नोलॉजी आसानी से इस्तेमाल के लिए मिल रही है। धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत हो जाती है, जो उनके मानसिक विकास में बाधा बनने के साथ उन्हें आपराधिक गतिविधियों की ओर ले जाती हैं।

ये मुख्यआंकड़े सामने आए

- 63 फीसदी से अधिक घरों में कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है।

- 27 फीसदी से अधिक बच्चे रोज इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।

- 86 फीसदी बच्चों के कमरों में खुद का स्मार्टफोन, म्यूजिक सिस्टम, कंप्यूटर, टेलीविजन मौजूद हैं।

ऑनलाइन गेम्स का क्रेज

- 70 फीसदी बच्चों में ऑनलाइन गेम्स का क्रेज।

- 62 फीसदी बच्चे इन्फॉर्मेशन सर्च करते हैं।

- 53 फीसदी सोशल नेटवर्किंग साइट्स।

- 18 फीसदी बच्‍चे वीडियो के शौकीन।

स्माटफोन में भी गेम्स का के्रज

- 84 फीसदी बच्चे स्मार्टफोन पर करते हैं बात।

- 83 फीसदी बच्चे गेम्स खेलते हैं।

- 56 फीसदी बच्चे म्यूजिक सुनते हैं।

- 35 फीसदी बच्चे वीडियो देखते हैं।

समाज से कट रहे बच्चे

यह बात सच है कि गैजेट्स का ज्यादा उपयोग करने वाले बच्चे समाज से कट रहे हैं। इसके जिम्मेदार पैरेंट्स और आज की जरूरत दोनों है। यदि जरूरत के अनुरूप ही बच्चों को गैजेट्स का उपयोग करने दिया जाए, तो गलत नहीं लेकिन पैरेंट्स बच्चों पर ध्यान नहीं देते और बच्चे गैजेट्स जरूरत नहीं बल्कि शौक के लिए उपयोग में लाने लगते हैं। पैरेंट्स बच्चों को समय दें, ताकि वे अपनी बात और अपनी परेशानियां उन्हें बता सकें। - रश्मि आहुजा, हेड मिस्ट्रेस, जूनियर स्कूल डेली कॉलेज

और बढ़ेंगी परेशानी

गैजेट्स के उपयोग से बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। शारीरिक गतिविधि बंद होने से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। शरीरिक क्षमता खत्म हो रही है और आंखों से संबंधित परेशानियां भी बढ़ रही हैं। सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि खेल के मैदान में बच्चे हार को सहन करना और जीत के लिए कोशिश करना सीखते हैं, लेकिन गैजेट्स में उलझे रहने से वे इससे दूर हो रहे हैं। इससे भविष्य में इन्हें बहुत परेशानी आ सकती है। - डॉ. दीपक मंशारमानी, मनोवैज्ञानिक

दिल का उपयोग नहीं करते बच्चे

गैजेट्स का ज्यादा उपयोग करने से बच्चे समाज में घुल-मिल नहीं पाते। इससे वे असामान्य व्यवहार करने लगते हैं और ज्यादातर हिंसक बन जाते हैं। आंख और दिमाग का तो इसमें प्रयोग होता है लेकिन दिल का उपयोग वे नहीं करते। जबकि सामाजिक होने के लिए दिल से काम लेना भी जरूरी है। - डॉ. मीनाक्षी स्वामी, समाजशास्‍त्री

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