पश्‍िचमी देशों के मुकाबले हमें दस साल पहले हो जाती है डायबिटीजUpdated: Fri, 13 Mar 2015 04:00 AM (IST)

जेनेटिक बनावट के कारण हमारे यहां के लोगों को पश्‍िचमी देशों के मुकाबले डायबिटीज दस साल पहले ही हो जाती है।

भोपाल (नप्र)। 'डायबिटीज के लिए काफी हद तक लाइफ स्टाइल तो जिम्मेदार है ही, लेकिन भारत में इसकी मुख्य वजह एक और है। वह है-हमारे देश के लोगों की जेनेटिक बनावट। जेनेटिक बनावट के कारण हमारे यहां के लोगों को पश्चिमी देशों के मुकाबले डायबिटीज दस साल पहले ही हो जाती है।

अगर अमेरिका में किसी व्यक्ति को 40 साल में डायबिटीज होती है, तो उसी तरह की लाइफ स्टाइल वाले भारतीय को 30 साल में ही डायबिटीज हो जाती है। इससे बचने के लिए हमें स्वास्थ्य का खास ख्याल रखना होगा। हमारा संस्थान डायबिटीज पर रिसर्च कर रहा है।'

यह बात आईसीएमआर के चैन्नई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडिमियोलॉजी के साइंटिस्ट-बी डॉ. तरुण भटनागर ने कही। डॉ. भटनागर ने बताया कि आमतौर पर डायबिटीज कुल आबादी की 8 से 9 प्रतिशत आबादी में होती है। लेकिन महानगर जैसे दिल्ली, मुंबई, चैन्नई, हैदराबाद आदि शहरों में डायबिटीज मरीजों की संख्या 14 प्रतिशत तक होती है।

चावल खाने से ज्यादा नुकसान

डॉ. भटनागर ने बताया कि हम जो खाना खाते हैं, उसे ग्लाइसिमिक इंडेक्स से मापते हैं। जिस खाने में ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा हो, उसके सेवन से डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा होती है। चावल में ग्लाइसिमिक इंडेक्स अधिक होता है। यही वजह है कि चावल का अधिक सेवन करने वाले दक्षिण भारतीय लोगों में डायबिटीज का खतरा अधिक रहता है।

भोपाल में 2 लाख मरीज

भोपाल में करीब 2 लाख डायबिटीज के मरीज हैं। कम उम्र के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज के कुल मरीजों में से 50 प्रतिशत 30 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। 23 साल तक के युवाओं सुगर होने लगी है।- डॉ. सचिन गुप्ता, डायबिटीज विशेषज्ञ, भोपाल

डायबिटीज के दो प्रकार

टाइप- 1 डायबिटीज बच्चों में होती है। इनमें इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथी होती ही नहीं है, जिससे उन्हें जीवन भर इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ता है।

टाइप-2 डायबिटीज बड़ों में होती है। इनमें इंसुलिन एक निश्चित आयु तक बनता है, इसके बाद बनना बंद हो जाता है। इंसुलिन शरीर में ग्लुकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है।

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