धार जिले के राजगढ़ में पांच धाम, एक मुकाम श्रद्धा का केंद्रUpdated: Sun, 18 Oct 2015 09:27 PM (IST)

राजगढ़ नगर का पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर 80 से ज्यादा गांव व अनेक जिलों में आस्था का केंद्र बन चुका है।

राजगढ़। नगर का पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर 80 से ज्यादा गांव व अनेक जिलों में आस्था का केंद्र बन चुका है। इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार हरियाणा के मूल निवासी यहां आकर बसे बड़े गुरुजी स्व. मुरलीधर महाराज के कर कमलों से हुआ था। मंदिर का संचालन गुरुदेव मुरारीलाल भारद्वाज व श्री नारायण जी भारद्वाज कर रहे हैं।

मां जगदंबे सहित भगवान गणेश, भोलेनाथ, राधा-कृष्ण, बजरंगबली व भैरवनाथ की चैतन्य प्रतिमाएं यहां विराजित हैं। यबावड़ी में आज भी जलधारा बहती है, इससे वर्षभर यहां पानी रहता है। मंदिर को बावड़ी वाला मंदिर भी कहा जाता है। 25 वर्ष पुराने श्री गणपति अंबिका युवा मंच के सहयोग से नवरात्रि का आयोजन सफल रूप से किया जा रहा है।

इसलिए है यहां का महत्व

ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम भारद्वाज ने बताया कि यहां वर्तमान में स्थित गणपति मंदिर अतिप्राचीन है। किसी को इसके बारे में यह जानकारी नहीं है कि इसकी स्थापना किसने व कब की थी। मंदिर में 70 वर्ष से अधिक माताजी की स्थापना को हो चुके हैं। पूर्व में यह सिद्ध क्षेत्र खंडहर की भांति विरान पड़ा था। गुरुदेव के आने के बाद यह क्षेत्र विरान मुक्त हो गया। यहां मां कामक्षा देवी की स्थापना की गई।

वर्तमान में मां अंबे की प्रतिमा जहां विराजित हैं, उनके बाएं महालक्ष्मी मां व दाहिने ओर कालरात्रि माताजी विराजित हैं। वहीं हनुमानजी के मंदिर के पास स्थित माताजी की चैतन्य प्रतिमा विराजित हैं। वह पश्चिम मुखी होकर मां कामक्षा देवी की ही हैं। मंदिर परिसर में नौ दीपक वर्षों से अखंड ज्योत के रूप में प्रज्ज्वलित हो रहे हैं।

वर्ष में सिर्फ दो दिन के लिए होते हैं गर्भ गृह में दर्शन

मंदिर के नीचे गर्भ गृह में मां कामाक्षा देवी की अति चैतन्य प्रतिमा विराजित हैं। भक्तों के दर्शनार्थ इसेे वर्ष में दो दिन नवरात्रि की अष्टमी व नवमी के लिए खोला जाता है। यहां बाबा भैरवनाथ भी विराजित हैं। इस वर्ष मंगलवार व बुधवार को दर्शन होंगे।-निप्र

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