अभी नहीं तो आगे रुला सकता है 'प्याज'Updated: Tue, 08 Apr 2014 09:03 PM (IST)

फिलहाल तो प्याज की कीमत आम जनता की पहुंच में है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों तक प्याज की कीमतों में भी नई तेजी आने की आशंका है।

पंकज भारती, इंदौर I लोकसभा चुनाव के इस मौसम में फिलहाल आम जनता को प्याज की कीमतों से किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम आते-आते प्याज की कीमतें आम जनता की आंखों में एक बार पुन: आंसू ला सकती है। इसका कारण पिछले माह प्याज उत्पादक राज्यों में हुई असमय बारिश व ओलावृष्टी को बताया जा रहा है।


महाराष्ट्र व मप्र में नुकसान

प्याज कारोबारियों का कहना है कि कुछ माह पहले अनुकूल मौसम को देखते हुए इस साल देश में प्याज की बंपर पैदावार की बात कहीं गई थी लेकिन अब स्थिति इसके एकदम विपरित बन रही है। क्योंकि पिछले माह हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण इस फसल को नुकसान पहुंचा है। इसके कारण दो सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रबी और खरीफ सत्र में होने वाले प्याज के उत्पादन में कमी आने की बात कही जा रही है। जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र में ही सबसे ज्यादा प्याज का उत्पादन और भंडारण होता है, लिहाजा पैदावार में कमी का असर इसके भंडारण पर भी पडऩे की आशंका है। गौरतलब है कि जून से प्याज की खपत की पूर्ति भंडारगृहों से होती है।


10 से 15 फीसदी कम

शुरुआती अनुमान के मुताबिक वर्ष 2013-14 में देश में करीब 190 लाख टन प्याज पैदा होने की उम्मीद थी लेकिन नुकसान के बाद अब इसमें लगभग 10 फीसदी की कमी आने की आशंका है। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास केन्द्र के अनुसार ओले और बारिश का असर मध्यप्रदेश के प्जाज उत्पादक क्षेत्रों में देखा गया। इसके चलते प्याज की पैदावार 10 फीसदी कम रह सकती है।

इसी प्रकार महाराष्ट्र के नासिक, अहमदनगर, पुणे और सोलापुर जिलों में रबी और खरीफ सत्र में देर से बोई जाने वाली वाली प्याज को नुकसान हुआ है। इससे महाराष्ट्र में कुल पैदावार शुरुआती अनुमान से 15 फीसदी तक घट सकती है। महाराष्ट्र में इस साल करीब 60 लाख टन उत्पादन का अनुमान था।


तेजी तो आएगी

इंदौर सब्जी मंडी विक्रेता संघ का कहना है कि प्रतिकूल मौसम ने बंपर प्याज उत्पादन की उम्मीद पर पानी फेर दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र में हुआ है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान समेत अन्य उत्पादक राज्यों में भी खास नुकसान की खबर है। जानकारों का कहना है कि उत्पादन के नुकसान से आगे प्याज की कीमतों में तेजी आ सकती है। प्याज कारोबारियों का कहना है कि नुकसान की खबर के बाद भी प्याज की कीमत स्थिर हैं जबकि रबी वाली प्याज मंडियों में आने से भाव गिरने चाहिए थे। कारोबारियों के मुताबिक इस माह के अंत तक भाव धीरे-धीरे बढऩे लगेंगे।

वहीं नुकसान की खबर के चलते जुलाई से प्याज की कीमतों में जोरदार तेजी की संभावना है। फिलहाल इंदौर मंडी में बेस्ट क्वालिटी प्याज के भाव 350 रुपए से 400 रुपए प्रति 40 किलो चल रहे हैं, अर्थात थोक बाजार में अभी प्याज 10 रुपए किलो बिक रहा है। थोक से खेरची में आते-आते इसके भाव 20 रुपए से 30 रुपए किलो तो वर्तमान में ही है।


आलू में भी आएगा उबाल

प्याज के साथ-साथ आलू की कीमतों में भी तेजी की बात कहीं जा रही है। क्योंकि बारिश से इस फसल को भी नुकसान पहुंचा है। आगरा स्थित जेएसआर एग्री इंफो के डायरेक्टर जयराम दयलानी का कहना है कि आलू का सबसे अधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है, इसमें भी आगरा में यह सबसे अधिक पैदा होता है। लेकिन गत दिनों आई बारिश से आगरा में ही 15-20 फीसदी आलू कम होने की आशंका है। कारोबारियों का कहना है कि आलू की कीमतों में भी अप्रैल अंत तक तेजी के आसार बनने लगेंगे। हालांकि कुछ कारोबारियों का कहना है कि यदि सट्टेबाज हावी हो जाते हैं तो यह तेजी अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से भी दिखाई देने लगेगी। इंदौर मंडी में फिलहाल बेस्ट आलू के भाव 450 रुपए से 470 रुपए प्रति 40 किलो बोले जा रहे हैं।


6 माह पहले भी रुला चुका है...

प्याज की कीमतों में तेजी का दंश आम जनता 6 माह पहले भी भोग चुकी है। अगस्त-सितंबर 2013 के दौरान प्याज की कीमतें 80 से 90 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। उस समय प्याज की कीमतें बढऩे की वजह कमजोर आवक और महाराष्ट्र में पड़े सूखे को बताया गया था। महाराष्ट्र में प्याज का भंडार खत्म हो चुका था और देश में प्याज की सबसे बड़ी मंडी नासिक व मुंबई सहित महाराष्ट्र की दूसरी प्रमुख मंडियों में मप्र से प्याज भेजा गया था। महाराष्टï्र के साथ ही पड़ौसी राज्य गुजरात व दक्षिण भारत में भी प्रदेश का प्याज गया था। जबकि होता यह था कि महाराष्टï्र व अन्य राज्यों से प्याज मध्यप्रदेश की मंडियों में आता था।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.