700 साल पुराने भीलटदेव मंदिर में तराश रहे सद्भाव का शिखरUpdated: Thu, 18 Dec 2014 03:00 AM (IST)

700 साल पुराने प्राचीन भीलटदेव मंदिर के निर्माण में हिंदुओं के साथ ही परंपरागत मुस्लिम शिल्पकार भी भूमिका निभा रहे हैं।

नागलवाड़ी शिखरधाम से शिव शर्मा/मनोज मालवीय। सतपुड़ा की पहाड़ी पर बने प्राचीन भीलटदेव मंदिर का इतिहास करीब 700 वर्ष पुराना है। इस मंदिर के साथ लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। श्रद्घालुओं की इसी आस्था ने इस मंदिर को आज भव्य रूप दे दिया। इस भव्यता में मजहबी दूरियों से परे सामाजिक सद्भाव के शिखर को तराशा जा रहा है। यहां अगले वर्ष 5 से 9 फरवरी तक नवनिर्मित मंदिर का लोकार्पण महोत्सव आयोजित होगा।

इस मंदिर के निर्माण में हिंदुओं के साथ ही परंपरागत मुस्लिम शिल्पकार भी भूमिका निभा रहे हैं। मकराना (राजस्थान) के नूर आलम (45) और उनकी 18 सदस्यीय टीम इस मंदिर के रंगमंडप के निर्माण में लगी है। नूर आलम ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां मंदिर, गुरुद्वारे व चर्च के रंगमंडप बनाने का काम कर रही है। उनके परदादा मुस्तफा मिस्त्री मशहूर मूर्तिकार थे।

किया कई मंदिरों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों के रंगमंडप का निर्माण

गत 20 वर्षों में भारत के 25 राज्यों के 65 प्रसिद्घ मंदिर, गुरुद्वारा व गिरजाघरों के रंगमंडप का निर्माण कर चुके हैं। समीपस्थ ग्राम ऊन स्थित पावागिरी जैन मंदिर, छत्तीसगढ़ का प्रसिद्घ डोंगरगढ़ मंदिर, गुजरात में रामथान धाम, रामेश्वरम के प्रसिद्घ गिरिजाघर, पंजाब के इसराना गांव के प्रसिद्घ गुरुद्वारा, दतिया के सोनागिरी जैन मंदिर, जोधपुर के बिलावास गांव के आईमाता मंदिर, दादर के कबूतरखाना के जैन मंदिर व राम मंदिर, नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर आदि के निर्माण में उनकी टीम ने भूमिका निभाई।

नूर आलम ने कहा कि नागलवाड़ी में वे और उनकी टीम गत 20 दिनों से काम कर रही है। इस टीम में इरफान अली, न्याज मोहम्मद, शाहिद अली, बुरहान एहमद, मोहम्मद अकरम, मुनाफ पटेल, जैनुल आबदिल, रिजवान आलम आदि शामिल है। मंदिर समिति के मार्गदर्शक दिनेश यादव, अध्यक्ष डॉ. बीएल गुप्ता व उपाध्यक्ष बजरंग गोयल ने बताया कि टीम मंदिर में पूजन व आरती में शामिल होकर प्रसाद भी ग्रहण करती है।

पांच वर्षों से जुटे हैं

इधर मंदिर में अन्य निर्माण कार्य गत पांच वर्षों से चल रहा है। इसमें राजस्थान के सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील के जनापुर गांव के शिल्पकारों की टीम देवेंद्र देवासी के नेतृत्व में काम में जुटी है। श्री देवासी ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से देशभर में मंदिरों का निर्माण कार्य कर रहे हैं। श्री देवासी ने बताया कि वे और उनकी टीम खंभों पर नक्काशी का काम कर रहे हैं। ये खंभे लाल पत्थर (बंशीपाल) से बने हैं।

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