डिप्रेशन के पहले शरीर देता है, ये पांच संकेत और न करें इन्हें नजरअंदाजUpdated: Fri, 15 Sep 2017 10:26 AM (IST)

शरीर हर बीमारी से पहले कुछ संकेत देता है, ताकि हम सावधान हो जाएं और बीमारी के जकड़ने से पहले ही इलाज करा सकें।

नई दिल्ली। हर आदमी कभी खुशी और कभी दुख का अनुभव करता है। यह जीवन का हिस्सा है और ऐसा ही चलता रहता है। मगर, यदि कोई हर समय ही दुखी रहता है, तो यह ठीक नहीं है। यह एक तरह की बीमारी है, जिसे डिप्रेशन कहा जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति हर समय निराशावादी, दुखी, हताशा में दिखता है और उसकी बातों में भी कहीं कुछ अच्छा होने के संकेत नहीं दिखते हैं।

शरीर हर बीमारी से पहले कुछ संकेत देता है, ताकि हम सावधान हो जाएं और बीमारी के जकड़ने से पहले ही समय रहते उसका इलाज करा सकें। इसी तरह से डिप्रेशन के पहले भी शरीर कई संकेत देता है। मगर, हम ही इसे समझ नहीं पाते हैं। अवसाद को समझने के लिए, आपको उसके भौतिक संकेतों के बारे में भी जागरूक होना चाहिए। समय पर इनका इलाज करके कोई भी व्यक्ति ठीक हो सकता है। जानते हैं इनके बारे में...

अचानक वजन घटाना या बढ़ाना

डिप्रेशन, भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को प्रभावित करता है। ऐसे में हो सकता है कि आप अधिक खाना खाने लगें या हो सकता है कि आप पहले से भी कम खाने लगें। इसके अलावा, डिप्रेशन के साथ जुड़ी नींद की समस्या इस मुश्किल को और बढ़ा सकती है। दरअसल, नींद में कमी होने पर भूख लगने और पेट भरा होने का संकेत देने वाले हार्मोंस के साथ गड़बड़ कर सकता है।

बदन और सिर में दर्द

कई बार मसल्स और जोड़ों में दर्द अवसाद के कारण हो सकता है। जब आप लगातार अपनी भावनाओं को अंदर ही अंदर दबाए रहते हैं, तो यह शरीर के दर्द के रूप में बाहर निकलती हैं। फिर यह सिर दर्द या पीठ के दर्द के रूप में भी हो सकता है। दबाई गई भावनाएं शारीरिक दर्द के रूप में सामने आती है।

खराब हाजमा

डिप्रेशन होने पर हाजमा खराब होना, कब्ज सहित कई तरह की पेट से जुड़ी परेशानियां सामने आती हैं। पेट खासतौर पर आपके मन को खुश रखने के लिए जिम्मेदार होता है। दरअसल, आपके पेट में तंत्रिका कोशिकाएं शरीर के कुल सेरोटोनिन का 80 से 90 प्रतिशत उत्पादन करता है। यह मनोदशा-बढ़ाने वाला न्यूरोट्रांसमीटर होता है।

नींद में गड़बड़

डिप्रेशन कई तरह के होते हैं, इसलिए नींद का कोई एक पैट्रन नहीं होता। कुछ लोग अवसाद के कारण रात रात भर नहीं सो पाते। इसे इंसॉम्निया कहा जाता है, तो कुछ जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं। कुछ लोगों को दिन के समय नींद आती है। डिप्रेशन होने पर व्यक्ति को अपनी एनर्जी में कमी लगने लगती है और पूरे दिन थकान लगती है। डिप्रेशन से आपकी नींद की गुणवत्ता भी कम हो सकती है।

माइग्रेन

बहुत तेज दर्द, सिरदर्द और माइग्रेन भी अवसाद से जुड़ा है। डिप्रेशन होने पर सिरदर्द हो सकता है। माइग्रेन का दर्द होने वाले व्यक्ति को यह सामान्य परेशानी होती है। डिप्रेशन जैसे मूड डिसॉर्डर के पीछे माइग्रेन हो सकता है या माइग्रेन की वजह से भी मूड डिसॉर्डर हो सकता है।

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