जानें ट्रंप ने क्यों दी यरुशलम को इजराइल की राजधानी की मान्यताUpdated: Thu, 07 Dec 2017 09:10 AM (IST)

संभवतः ईरान के खिलाफ यूएस-सऊदी-इजरायल गठबंधन बन जाए, जिनका आम दुश्मन ईरान है।

वॉशिंगटन। अमेरिका ने यरुशलम को इजराइल की राजधानी मान लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए इसे मंजूरी दी। इसके बाद उन्होंने अपने एक बयान में इसे लंबे समय से रुका हुआ एक कदम करार दिया है।

गौरतलब है कि पहले के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, जार्ज बुश व बराक ओबामा मध्य पूर्व की हालत को देखते हुए इस पर अमल करने से बच रहे थे। इस फैसले से यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में अमेरिकी मान्यता मिल गई है।

ये फैसला साल 1995 में ही अमेरिका ने किया था, लेकिन हिंसा और मध्य-पूर्व में अशांति न हो, इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति इस फैसले को लागू करने से बचते रहे। अब सवाल यह है कि आखिर इससे ट्रंप को क्या फायदा मिलेगा, जानते हैं इसके बारे में...

ट्रंप को क्या मिलेगा

इसमें कोई संदेह नहीं है कि ट्रंप के इस कदम के बाद उन्हें इजरायल के कट्टरपंथी समर्थकों के अपने कोर बेस को खुश किया है। मगर, मध्य पूर्व में सबसे अधिक राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। संभवतः ईरान के खिलाफ यूएस-सऊदी-इजरायल गठबंधन बन जाए, जिनका आम दुश्मन ईरान है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम के पीछे सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का गुप्त रूप से हाथ भी हो सकता है। दरअसल, ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व के सलाहकार जेरेड कुश्नेर की सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ करीबी संबंध हैं। कुश्नेर पर इजराइली बस्तियों के हित में काम करने का भी आरोप है।

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