नकली गौरैया की आवाज सुन आ जाती है असलीUpdated: Sat, 16 Apr 2016 04:00 AM (IST)

मिट्टी की चिड़िया बनाकर एक छोटा सा छेद सिर की तरफ और सीटी बजाने के लिए दो छेद पूंछ की ओर किए जाते हैं।

इंदौर। प्रो. राम आरके प्रोफेशन से साइंटिस्ट मगर दिल से पक्के पर्यावरण प्रेमी हैं। एक ग्रामीण हाट में उन्हें मिट्टी की बनी छोटी (सीटी के आकार की) गौरैया और दूसरी चिड़िया दिखीं, जिनमें पानी भरकर बजाने पर एक साथ कई चिड़ियों के चहचहाने जैसी आवाज हो रही थी।

प्रोफेसर ऐसी कुछ नकली चिड़िया लेकर मानवतानगर स्थित घर गए। वहां उन्हें बजाया तो आसपास के लोग, खासतौर पर बच्चे इकट्ठे हो गए। उनमें जगे कौतूहल को देख प्रो. राम को परिंदों को बचाने का नया आइडिया सूझ गया। वे लोगों को ये कहकर नकली गौरैया गिफ्ट करने लगे कि रोज आंगन में इसे जरूर बजाएं। लोगों ने अपने जब नकली सीटी वाली गौरैया को सीटी की तरह बजाना शुरू किया, तो गौरैया और अन्य चिड़ियाएं आंगन में आकर्षित होने लगीं।

प्रोफेसर अब तक मिट्टी की करीब 400 नकली गौरैया और चिड़िया बांट चुके हैं। इनके जरिए वे लोगों को जागरुक कर रहे हैं कि तरक्की के नाम पर हो रहे सीमेंटीकरण के चलते हम परिंदों को किस तरह खत्म करते जा रहे हैं। इन्हें बचाना जरूरी है वरना भविष्य में हम उनकी चहचहाहट सुनने को तरस जाएंगे। उनके कई साथी भी इस नेक काम में साथ जुड़ गए हैं। काफिला रफ्ता-रफ्ता ही सही मगर आगे बढ़ रहा है।

आकर्षित होती हैं असली गौरैया

प्रीति राव बताती हैं कि प्रो. राम के अरसा पहले दिए गए नकली चिड़िया के गिफ्ट को उन्होंने न केवल अब तक सहेज कर रखा है बल्कि अपनी छत पर परिंदों को आकर्षित करने के लिए कमोबेश ऱोजाना इसका उपयोग भी करती हैं, क्योंकि नकली चिड़िया की आवाज असली चिड़ियों से इस हूबहू मिलती है। प्रीति के मुताबिक सुबह-शाम चिड़ियों की चहचहाहट हमें चंद मिनटों में ही रिलैक्स कर देती है। बच्चों के साथ-साथ बड़ों पर भी इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

'विंड-वाटर सक्शन थ्योरी' पर काम करती है चिड़िया

मिट्टी की चिड़िया बनाकर एक छोटा सा छेद सिर की तरफ और सीटी बजाने के लिए दो छेद पूंछ की ओर किए जाते हैं। इसके बाद बीच में पानी भर के जब सीटी बजाई जाती है तो एक साथ कई चिड़ियों के चहचहाने जैसी आवाज निकलती है, जिससे आकर्षित होकर आसपास पेड़ों, मुंडेरों पर बैठे परिंदे खिंचे चले आते हैं। प्रो. राम बताते हैं कि नकली चिड़िया 'विंड-वाटर सक्शन थ्योरी' पर काम करती हैं। इतनी आवाज इतनी सुरीली और मीठी होती है कि लगता है कई पक्षी एक साथ चहचहा रहे हैं। नकली गौरैयाओं को यूं तो काली मिट्टी से भी बनाया जा सकता है मगर चीनी मिट्टी से बनी गौरैया की आवाज ज्यादा मीठी होती है। ये देखने में भी ज्यादा आकर्षक होती हैं।

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