विश्व गौरैया दिवस : हरियाली फैलाकर फिर बुलाएं सदियों की साथी कोUpdated: Sun, 20 Mar 2016 11:28 PM (IST)

सदियों से इंसान के साथ रहती आई गौरैया आधुनिकीकरण की अंधी दौड़ में लुप्त होने लगी है।

इंदौर(मध्यप्रदेश)। सदियों से इंसान के साथ रहती आई गौरैया आधुनिकीकरण की अंधी दौड़ में लुप्त होने लगी है। शहरों में अब यह मुश्किल से दिखाई देती है। गांवों में भी इनकी संख्या कम होती जा रही है।

पक्षी विशेषज्ञ अजय गड़ीकर बताते हैं गौरैया इंसान के साथ रहने वाला पक्षी है। इन्हें आप जंगलों या विषम परिस्थितियों में कम पाएंगे। आधुनिकीकरण की दौड़ इस पक्षी पर भारी पड़ रही है। इसलिए जरूरी है कि घरों के आस-पास और कॉलोनी में इनके लिए माहौल तैयार करें। एक बार इनके अनुकूल माहौल तैयार कर भोजन-पानी की व्यवस्था कर दें। फिर देखिए ये लौट आएंगी।

चलाया जागरुकता अभियान

नेचर एंड वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एंड कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन द्वारा विश्व गौरैया दिवस पर बच्चों में जागरुकता फैलाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम करवाया गया। इसके तहत भंवरकुआं क्षेत्र में स्कूली बच्चों को एकत्रित करके उन्हें गौरैया की तस्वीरें दिखाई गईं। बच्चों को गौरैया के विलुप्त होने के कारण भी समझाए गए।

संस्था के अध्यक्ष रवि शर्मा कहते हैं कि पहले घरों में आसानी से गौरैया दिखाई देती थी, लेकिन आज की पीढ़ी को इस खूबसूरत पक्षी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। नई पीढ़ी को गौरैया से जोड़ने के लिए ही यह कार्यक्रम करवाया गया था।

इन कारणों से लुप्त हो रही

- मोबाइल टावर रेडिएशन।

- घर में घोंसला बनाने की जगह न होना।

- शहरी आबादी में भोजन-पानी का अभाव।

- कीटनाशकों का दुष्प्रभाव और कम होते कीड़े।

इस तरह बुलाएं अपने घर

- घर में छोटा-सा बगीचा बनाएं।

- गौरैया के लिए आर्टिफिशियल नेस्ट लगाएं।

- छत या बगीचे में उनके भोजन के लिए ज्वार, बाजरा जैसे अनाज रखें।

- गर्मियों में विशेष रूप से उनके लिए पानी रखें।

- घर में कीटनाशकों का छिड़काव न करें।

- पर्यावरण स्वच्छ रखें।

अटपटी-चटपटी

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