रानी पद्मावती की झलक दिखाने की कहावत से नाराज करणी सेना ने चित्तौड़ महल का कांच तोड़ाUpdated: Mon, 06 Mar 2017 06:23 PM (IST)

फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्धमावती के निर्माण को लेकर शुरू हुए विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है।

जयपुर। फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्धमावती के निर्माण को लेकर शुरू हुए विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान में राजपूत समाज इस मामले को लेकर पहले से ही सड़कों पर उतर चुका, वहीं अब दूसरी ओर करणी सेना ने अपनी धमकी को अंजाम देते हुए चित्तौड़गढ़ महल में लगे कुछ कांच तोड़ दिए। घटना रविवार शाम की है।

ऐसा दावा किया जाता है कि महल में लगे कांचों में 13वीं शताब्दी में अलाउद्ीन खिलजी को चित्तौड़ की रानी पद्मावती की झलक दिखाई गई थी। अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मावदी को हासिल करना चाहता था, लेकिन फिर मध्य का रास्ता निकालते हुए उसे कांच में ही रानी को दिखाया गया था।

करणी सेना ने करीब दो सप्ताह पूर्व धमकी दी थी कि चित्तौड़गढ महल में लगे कांच को नहीं हटाया गया तो उसके कार्यकर्ता खुद तोड़ देंगे। राज्य के पुरातत्व विभाग और पुलिस ने धमकी को गंभीरता से नहीं लिया। इसी का फायदा उठाते हुए करणी सेना ने अपनी धमकी को अंजाम दे दिया।

बता दें कि काफी समय से राजपूत समाज महल में लगे कांच को हटाने की मांग कर रहा था। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को गाइड यह बताते रहे हैं कि इस महल में लगे कांच में ही अलाउदीन खिलजी ने रानी पद्मावती को देखा था।

राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों का आरोप है कि गाइड और कुछ साहित्यों में झूठी कहानियां बताई जा रही है। करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी का कहना है कि रानी पद्मावती के कालखण्ड के दौरान कांच का आविष्कार ही नहीं हुआ था। ऐसे में कांच में अलाउद्दीन खिलजी को रानी को दिखाने की बात कोरी कल्पना है। यह कांच काफी बाद में लगाए गए थे।

इस मामले में महल के कार्यवाहक संरक्षण सहायक प्रेम चंद शर्मा ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया है। इधर करणी सेना के पदाधिकारी सहदेव सिंह ने माना है कि कांच उन्होंने ही तोड़े हैं। बता दें कि शुक्रवार को पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा की अगुवाई में आरक्षण को लेकर निकाली गई रैली में कांच हटाने की मांग की गई थी।

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