जज ने पूछा- क्या 10 रु. के शपथ पत्र पर मैं खुद को गोपाल मोहम्मद कह सकता हूंUpdated: Thu, 02 Nov 2017 10:32 AM (IST)

धर्म परिवर्तन कर शादी करने के एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से धर्म परिवर्तन के नियमों की जानकारी मांगी है।

नईदुनिया ब्यूरो, जयपुर। धर्म परिवर्तन कर शादी करने के एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से धर्म परिवर्तन के नियमों की जानकारी मांगी है। इस मामले में हाई कोर्ट ने युवती को सात दिन के लिए नारी निकेतन भेजने के निर्देश दिए और पुलिस को सख्त हिदायत दी कि इस दौरान युवती से कोई न मिल पाए।

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ में एक युवती के गायब होने और छह माह पहले धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम लड़के से निकाह करने के मामले की याचिका दायर हुई थी। इस मामले में कोर्ट में बुधवार को युवती को पेश किया गया। सुनवाई करते हुए न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने तल्ख टिप्पणी करते हुए यहां तक कहा- 'कल मैं भी दस रुपए के शपथ पत्र पर स्वयं को गोपाल मोहम्मद कह सकता हूं क्या?' न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने कहा कि कोई अपना धर्म परिवर्तन कैसे कर सकता है।

इसके बारे में यह है नियम -

इस पर सरकारी वकील ने उन्हें बताया कि कुछ राज्यों में धर्म परिवर्तन करने के बारे में नियम बने हुए हैं, लेकिन राजस्थान में अभी तक यह नियम फाइलों में ही अटके हैं। इस पर न्यायाधीश ने राज्य सरकार से धर्म परिवर्तन करने के नियमों के बारे में जानकारी स्पष्ट करने का आदेश दिए। न्यायाधीश ने इस मामले में पुलिस की ओर से पेश निकाहनामे पर हुई बहस के बाद पुलिस को इसकी विस्तृत जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिए। न्यायाधीश ने पुलिस को इस बात के लिए लताड़ भी लगाई कि उसने बिना जांच किए निकाहनामा और युवती की ओर से दिया गया शपथ-पत्र स्वीकार कर लिया।

यह है मामला -

दरअसल, जोधपुर के नरपत नगर इलाके के एक शख्स ने फैज मोदी के खिलाफ उसकी बहन की आपत्तिजनक हालत में फोटो खींचकर उसे ब्लैकमेल करने का केस दर्ज कराया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने उसे ब्लैकमेल कर अगवा कर लिया। वह उसका धर्म परिवर्तन करवाकर निकाह का नाटक रचकर ज्यादती कर सकता है। पुलिस ने जब कोई खास कार्रवाई नहीं की तो परिजन कोर्ट चले गए। यहां जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास व मनोज कुमार गर्ग की खंडपीठ ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए प्रतापनगर थाने के एसएचओ को तलब किया।

परिजन ने बताया लव जिहाद जैसा मामला -

एसएचओ ने 14 अप्रैल को जारी किए गए निकाहनामे की फोटोकॉपी पेश की। परिजनों के वकील ने इसे फर्जी बताया और कहा कि लड़की 25 अक्टूबर तक तो परिवार में रह रही थी। फिर वह छह माह पहले कैसे धर्म परिवर्तन कर विवाह कर सकती है? यह लव जिहाद जैसा मामला है। शहर में अब तक इस तरह के सात-आठ मामले सामने आ चुके हैं।

कोर्ट ने प्रतापनगर थाना पुलिस को एफआईआर रजिस्टर करने और निकाहनामे की विश्वसनीयता की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के तहत ही महिला को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया।

परिजनों का आरोप है कि उनकी लड़की को आरोपी फैज मोदी परेशान करता था। उसने उसके कुछ फोटोग्राफ भी खींच लिए और उसे इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देता था। इसके बदले में उसने कुछ पैसों की भी मांग की, पैसे लेने के बावजूद फोटोग्राफ नहीं दिए और ब्लैकमेल करने लगा। एक दिन वह कॉलेज जा रही थी, तब फैज और उसके दोस्तों ने जबरन कार में डालकर उसका अपहरण कर लिया। फिर कुछ पेपर पर जबरन हस्ताक्षर ले लिए। शादी के फर्जी दस्तावेज तैयार करा लिए। यह दस्तावेज ही पुलिस को दे दिए गए।

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