पद्मिनी को शीशे में खिलजी को दिखाने की कहानी पर भी आपत्तिUpdated: Tue, 14 Feb 2017 02:34 PM (IST)

करणी सेना ने चित्तौड़गढ़ किले की सैर कराने वाले गाइडों को भी चेताया है कि वे पर्यटकों को ऐसी कोई कहानी न सुनाएं।

जयपुर। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर आपत्ति कर रही राजस्थान की राजपूत करणी सेना ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से मांग की है कि चित्तौड़गढ़ के किले के पद्मिनी महल में लगे शीशों को हटाया जाए। करणी सेना का दावा है कि आक्रमणकारी अलाउद्दीन खिलजी को शीशे के जरिए पद्मिनी को दिखाए जाने की कहानी पूरी तरह गलत है।

ऐसा कुछ नहीं हुआ था। करणी सेना ने चित्तौड़गढ़ किले की सैर कराने वाले गाइडों को भी चेताया है कि वे पर्यटकों को ऐसी कोई कहानी न सुनाएं। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना का कहना है कि पद्मिनी का काल खण्ड 1303 इस्वी का है और खिलजी को शीशे में पद्मिनी का प्रतिबिम्ब दिखाए जाने की कहानी मलिक मोहम्म्द जायसी द्वारा रचित पद्मावत पर आधारित है।

इसकी रचना 1540 में हुई है यानी करीब 237 वर्ष बाद। ऐसे में इस बात का कोई ऐतिहासिक तथ्य नहीं है कि खिलजी को पद्मिनी का प्रतिबिम्ब कांच में दिखाया गया। महिपाल सिंह का कहना है कि चित्तौड़गढ़ किले में लगे शीशों को दिखा कर यही कहानी पर्यटकों को सुनाई जाती है।

इसके अलावा यहां चलने वाले लाइट एंड साउंड शो में भी यही कहानी बताई जाती है, जो पूरी तरह गलत है। करणी सेना ने पुरातत्व विभाग से कहा है कि यह शीशे सात दिन में हटाए जाएं और लाइट एंड साउंड शो की स्क्रिप्ट भी बदली जाए।

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