चातुर्मास में इसीलिए सोते हैं श्रीहरि

राजा मांधाता के राज्य में जब वर्षा नहीं हुई तो वे परेशान हुए और उन्होंने वन की राह ली। यहां राजा मांधाता ने ऋषि अंगिरा की शरण ली। ऋषि ने उन्हें देवशयनी एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया। राजन ने यह व्रत किया और स्वयं समेत पूरी प्रजा का कल्याण हुआ।

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