भ्रम में न पड़ें, आपके रक्तदान से मिलेगा किसी को जीवनदानUpdated: Wed, 14 Jun 2017 09:32 AM (IST)

लोगों में रक्तदान को लेकर जागरुकता तो बढ़ी है, लेकिन अभी भी कई लोग कुछ मिथक या भ्रम के कारण खून देने से कतराते हैं।

मल्टीमीडिया डेस्क। दुनियाभर में हजारों लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि उन्हें समय पर रक्त नहीं मिल पाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता नहीं है। उल्टा समाज में कई तरह के भ्रम भी फैले हैं। इन्हीं भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को जागरूक बनाने के लिए हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनेशन डे मनाया जाता है।

हालांकि, लोगों में रक्तदान को लेकर जागरुकता तो बढ़ी है, लेकिन अभी भी कई लोग कुछ मिथक या भ्रम के कारण खून देने में कतराते हैं। जानते हैं रक्तदान से जुड़े ये मिथक क्या हैं, रक्तदान किसे करना चाहिए और इस दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

खून की कमी होती हैः कुछ लोगों को भ्रम है कि रक्तदान करने के बाद शरीर में खून की कमी हो जाएगी। यह पूरी तरह गलत धारणा है। रक्तदान के 48 घंटे बाद रक्त की क्षतिपूर्ति हो जाती है। इतना ही नहीं, अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो हर तीन महीने में एक बार रक्तदान कर सकते हैं।

सेहत को नुकसानः रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। इससे डोनर की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है। रक्तदान से दिल की बीमारियों की आशंका कम करने में सहायता होती है। शरीर में अतिरिक्त आयरन को जमने से रोकता है।

दर्द होता हैः रक्तदान के बारे में कुछ लोग मानते हैं कि यह दर्दनाक प्रक्रिया है, लेकिन यह गलत है। सुई चुभोने का एहसास होता है और रक्त निकलने में कोई परेशानी नहीं होती है।

बीपी का मरीज हूंः यदि रक्तदान के समय आपका बीपी 180 सिस्टोलिक से कम और 100 डाइस्टोलिक तक है तो आप रक्तदान कर सकते हैं। बीपी की गोलियां खाने से रक्तदान का कोई संबंध नहीं है। सर्दी, जुकाम, पेट खराब होने या अन्य किसी बीमारी के दौरान रक्तदान न करें। एंटीबायोटिक लेने पर भी ब्लड डोनेशन से बचें।

व्रत या रोजे में नहीं कर सकते दानः व्रत या रोजे में भी रक्तदान किया जा सकता है। इससे रोजा नहीं टूटता है। कई बार मौलवी भी यह बात कह चुके हैं। वहीं व्रत में रक्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता। पूरे दिन भूखे रहने के कारण कुछ कमजोरी लग सकती है।

ब्लड डोनेशन के फायदे

ब्लड देने का सबसे बड़ा फायदा डोनर को ही होता है। दरअसल, रक्त देने से पहले ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है। ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी, सिफलिस और मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर खून तो नहीं लिया जाता है, लेकिन डोनर को संभावित बीमारी के बारे में समय पर जानकारी मिल जाती है। वह समय रहते इनका उपचार कर सकता है।

वहीं, ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम होती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है। जितना खून लिया जाता है, उतना 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। वहीं, ब्लड की मात्रा शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरी हो जाती है। ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है।

रक्त दान के बाद ये चीजें जरूर लें

रक्त देने के बाद ज्यादा मात्रा में पानी पीएं। यह शरीर में हुए तरल की कमी पूरा करता है और इसे ब्लड प्रेशर भी सामान्य रहता है। जूस भी ले सकते हैं। वहीं विटामिन्स की कमी को दूर करने के लिए भी कुछ चीजों को खाने में शामिल कर सकते हैं। लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए विटामिन बी-2 आवश्यक है और यह ऊर्जा भी देता है। दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली से इसकी पूर्ति होती है।

वहीं, नई लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए फोलेट या बी-9 की जरूरत होती है। बींस, संतरा, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां इसका अच्छा स्रोत हैं। स्वस्थ रक्त कोशिकाओं व प्रोटीन के लिए विटामिन बी-6 की जरूरत होती है। प्रोटीन में कई ऐसे पोषक तत्त्व होते हैं, जिनकी जरूरत ब्लड देने के बाद पड़ती है। विटामिन बी-6 की पूर्ति के लिए आलू, केला, नट्स, पालक आदि खाएं।

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