कैसे समय बिताते हैं लोग, सरकार करेगी सर्वेUpdated: Tue, 20 Jan 2015 02:52 PM (IST)

सरकार जल्‍द ही एक सर्वे करने जा रही है, जिसमें यह पता किया जाएगा कि लोग अपने दिन के 24 घंटे कैसे बिताते हैं।

नई दिल्‍ली। सरकार जल्‍द ही एक सर्वे करने जा रही है, जिसमें यह पता किया जाएगा कि लोग अपने दिन के 24 घंटे कैसे बिताते हैं। इसके जरिये सरकार यह पता करेगी कि भारतीय बच्‍चे पढ़ने में कितना समय बिता रहे हैं। इस डाटा के जरिये यह अतिरिक्‍त जानकारी भी पता चल सकेगी कि बच्‍चे इंटरनेट, फोन और टीवी पर कितना समय बिता रहे हैं।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा ऑल इंडिया टाइम यूज सर्वे किया जाएगा, जिसका ज्‍यादातर फोकस महिलाओं पर होगा। खासतौर पर तब जबकि अधिकांश अध्‍ययनों में महिलाओं के घरेलू काम जैसे खाना बनाने, सफाई, बच्‍चों के होमवर्क, पति के कपडों को प्रेस करने आदि में नजरअंदाज कर दिया जाता है। इनमें से किसी को भी डाटा में शामिल नहीं किया जाता है।

अर्थशास्‍त्री एसआर हाशिम ने कहा कि महिलाएं मल्‍टी-टास्किंग करती हैं, वो खाना बनाने से लेकर सिलाई, बच्‍चों को स्‍कूल छोड़ने, औपचारिक काम जैसी विविध गतिविधियों में शामिल रहती हैं। मगर इसमें से अधिकांश काम को जीडीपी में शामिल नहीं किया जाता है।

हाशिम उस कमेटी के अध्‍यक्ष हैं, जिसने सर्वे के लिए 1000 गतिविधियों को शामिल किया है। इनमें सट्टेबाजी, फिल्‍में देखने, जॉब इंटरव्‍यू की तैयारी करने, योगा का अभ्‍यास करने और वोदका पीना शामिल किया गया है। इसके पीछे मकसद यह पता करना है भारत में लोग अपने 24 घंटे कैसे बिताते हैं, ताकि विकास की गुणवत्‍ता की समझ विकसित की जा सके। जीडीपी उत्‍पादिक वस्‍तुओं और सेवा उत्‍पादों के मूल्‍य को मापने का मात्रात्‍मक तरीका है।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) या किसी बाहरी एजेंसी से यह सर्वे कराया जाएगा। सोशल मीडिया इस सवाल-जवाब का स्‍वाभाविक तौर पर हिस्‍सा रहेगा कि लोग फेसबुक या वॉट्सएप पर कितना समय बिताते हैं। अन्‍य सवालों से लैंगिक असमानता और समानता का पता चलेगा, जैसे क्‍या पुरुष खरीदारी करने और खुद को निखारने में भी उतना समय लगाते हैं, जितना महिलाएं करती हैं। या कि लोग कितना समय बिना कुछ किए बर्बाद करते हैं।

हाशिम ने बताया कि हमने गुजरात और बिहार में प्रायोगिक तौर पर किए गए सवालों की एक सूची तैयार की है। इसका सैंपल मॉडल भी तैयार है। सर्वे कई अध्‍ययनों के आधार पर किया जाएगा, जिसमें कई रुझानों पर जोर होगा और कई मिथक टूटेंगे। संयुक्‍त राष्‍ट्र के सांख्यिकी विभाग की ओर से किए गए एक अध्‍ययन के अनुसार वर्ष 1990 से 2008 के बीच 60 से अधिक देशों ने कम से कम एक नेशनल या पायलट टाइम यूज सर्वे किया है।

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