प्रदूषित हवाएं हो सकेंगी रिसाइकल, बनेंगे इंक और पेंटUpdated: Fri, 26 Aug 2016 04:59 PM (IST)

एक भारतीय स्‍टार्टअप का दावा है कि इन प्रदूषित हवाओं को रिसाइकल कर पेंट और स्‍याही बनाई जा सकती है।

बेंगलुरु। वायु प्रदूषण एक बड़ा चिंता का विषय बना हुआ है लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि वातावरण में फैली इन प्रदूषित हवाओं का संसाधन के रूप में इस्‍तेमाल किया जा सकता है। यानी इन हानिकारक हवाओं को रिसाइकिल किया जा सकता है। एक भारतीय स्‍टार्टअप का दावा है कि इन प्रदूषित हवाओं को रिसाइकल कर पेंट और स्‍याही बनाई जा सकती है।

एमआईटी म‍ीडिया लेब्‍स के ग्रैविकी लैब्‍स ने एक ऐसा यंत्र बनाया है जिससे प्रदूषित हवा को रिसाइकिल कर स्याही और पेंट बनाते हैं, उसे 'कालिंक' नाम दिया गया है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि अपने स्रोत से प्रदूषित कार्बन को ग्रहण करने में यह उपकरण दुनिया में अपनी तरह का पहला यंत्र है।

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ग्रैविकी लेब्‍स का बेंगलुरु स्थित मुख्‍यालय है। इसका संचालन सह-संस्‍थापक निखिल कौशिक, नितेश काद्यान और अनिरुद्ध शर्मा द्वारा किया किया जाता है। उनका दावा है कि प्रदूषित हवाओं को कम करने का यह एक वैकल्‍पिक उपाय है। गाड़ियों से निकलने वाली ये कालिख सीधे वातावरण में जाकर हवा को प्रदूषित करती है, लेकिन इस उपकरण द्वारा कालिख को वातावरण में जाने से पहले ही रोका जा सकेगा।

निखिल कौशिक का कहना है कि दिन के अंत में प्रदूषण रंगद्रव्य बन जाता है जिसका इस्तेमाल चित्र बनाने के लिए किया जा सकता है। इससे दो समस्याओं का समाधान हो जाएगा। एक तो प्रदूषण को कम किया जा सकता है और दूसरा इससे स्याही या पेंट बना कर अन्य रसायन के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।

ये है कालिंक

कालिंक एक बेलनाकार यंत्र है, जिसे वाहनों में धुएं के निकासी पाइप से जोड़ा जा सकता है। यह यंत्र इंजन को प्रभावित नहीं करता है। यइ पाइप से 93 प्रतिशत प्रदूषण ग्रहण कर लेता है। इससे एकत्रित हुए कार्बन कालिख से शुद्ध कार्बन हटा दिया जाता है। इसके बाद तेल के साथ मिलकार इंक और पेंट बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक इनकी 30ML इंक किसी कार के 45 मिनट के धुएं के उत्सर्जन के बराबर है

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