आरुषि केसः बरी हुए तलवार दंपती सोमवार को हो सकते हैं रिहाUpdated: Fri, 13 Oct 2017 01:29 PM (IST)

HC के तलवार दंपती को बरी करने के आदेश की सत्यापित कॉपी सोमवार को मिलने के बाद ही दोनों की रिहाई का आदेश जारी होगा।

नोएडा। आरुषि-हेमराज हत्याकांड के आरोपों से बरी हुए तलवार दंपती की जेल से रिहाई 16 अक्टूबर को ही हो सकेगी। शुक्रवार देर शाम तक सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की अदालत में हाई कोर्ट के आदेश की सत्यापित कॉपी नहीं आ सकी थी। ऐसे में उनकी रिहाई टल गई।

वहीं शनिवार और रविवार कोर्ट में छुट्टी रहेगी। ऐसे में हाई कोर्ट के तलवार दंपती को बरी करने के आदेश की सत्यापित कॉपी सोमवार को मिलने के बाद ही दोनों की रिहाई का आदेश जारी हो सकेगा।

दोहरे हत्याकांड में डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को बरी करने के आदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धारा 437 (ए) का क्लॉज लगाया है। इसके चलते तलवार दंपती को सीबीआई की विशेष अदालत में बेल बॉन्ड भरना होगा। प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये की दो-दो जमानत पेश करनी होगी।

इस बेल बांड की अवधि छह माह होगी। इस समयावधि के दौरान ऊपरी अदालत में इनके खिलाफ कोई अपील होती है तो तलवार दंपती को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। वहीं अगर छह माह में कोई अपील नहीं होती है तो तलवार दंपती इस केस से पूरी तरह बरी हो जाएंगे।

कानूनी जानकारों का कहना है कि तलवार दंपती के अधिवक्ताओं को हाई कोर्ट के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी सीबीआई की विशेष अदालत में देनी होगी। इसके बाद बेल बॉन्ड भरवाने व जमानत संबंधी सारी प्रक्रिया पूरी होने पर ही अदालत से रिहाई का आदेश जारी होगा।

पूर्व में सीबीआई की विशेष अदालत में शार्ट टर्म बेल के वक्त दिए गए दो बेल बॉन्ड अभी वैध हैं। अगर तलवार दंपती के अधिवक्ता उस बेल बॉन्ड और उन्हें जमानत देने के लिए आवेदन करते हैं, तो उनका पता न बदलने की स्थिति में उन्हें मान्य कर दिया जाएगा।

क्या है धारा 437 (ए)-

धारा 437 (ए) के मुताबिक जब कोई व्यक्ति दोषमुक्त होता है तो एक निश्चित समयावधि में ऊपरी अदालत में अपील होने तक जमानत देनी होती है, क्योंकि ऊपरी अदालत में कोई अपील होने पर अगर संबंधित शख्स के कोर्ट में उपस्थित होने की जरूरत पड़ती है तो उसे मौजूद होना पड़ता है।

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