ऑनलाइन मतदान आयोग का अगला कदमUpdated: Fri, 27 Feb 2015 08:30 PM (IST)

चुनाव आयोग ने जल्दी ही ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया शुरू करने को अगला कदम बताया।

नई दिल्ली। मतदाता पहचान पत्र को जल्दी ही आधार कार्ड के साथ जोड़ा जाएगा। चुनाव आयोग ने इसके ऐलान के साथ ही जल्दी ही ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया शुरू करने को अगला कदम बताया। आयोग का कहना है कि एक बार मतदाता सूची को पूरी तरह सही कर लेने के बाद आयोग इसकी ओर आगे बढ़ सकता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्माा ने शुक्रवार को इस बारे में पूछे गए सवाल पर कहा, "हमें इसके लिए जरूरी धन, ढांचागत सुविधाओं और कुछ प्रशिक्षण की जरूरत होगी। लेकिन यह किया जा सकता है।" उन्होंने खुद कहा कि दिल्ली विधानसभा के लिए जब वे मतदान कर रहे थे तो कुछ युवाओं ने उनसे कहा कि मतदान में तो महज चंद सेकेंड का समय लगता है, लेकिन इसके लिए घंटों लाइन में खड़ा होना होता है।

ब्रह्मा ने कहा कि समस्याओं को दूर करने के लिए तकनीकी का सहारा लेना उचित ही है। हालांकि एक दिन पहले ही कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था कि इंटरनेट के जरिए वोटिंग की व्यवस्था शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।

आधार से जुड़ेगा वोटर आइडी

वोटर आइडी कार्ड को आधार कार्ड से जोड़े जाने की तैयारी है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में मौजूद फर्जी नामों को हटाने के इरादे से यह अभियान शुरू किया। जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं होगा, मतदान का अधिकार उनको भी होगा।

मगर ऐसे लोगों का आयोग विशेष तौर पर सत्यापन करेगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह इंटरनेट के जरिए मतदान पर भी विचार कर रहा है।

आधार दूर करेगा फर्जी वोटर

उन्होंने माना कि इस समय मतदाता सूची में 10 से 12 फीसद नाम गलत हो सकते हैं। यहां तक कि एक शहर में तो 42 फीसद नाम गलत पाए गए हैं। लेकिन उनका दावा है कि मतदाता पहचान को आधार कार्ड से जोड़कर इस समस्या को दूर किया जा सकता है।

ब्रह्मा ने कहा कि मौजूदा मतदाताओं में से 50 करोड़ के पास आधार नंबर मौजूद है। जिनके पास ये कार्ड नहीं होंगे, उनको भी मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसे लोगों का अलग से सत्यापन और जांच होगी।

15 अगस्त से सूची शुद्धीकरण

मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार आयोग मतदाता सूची का पूरी तरह शुद्धीकरण करना चाहता है। आयोग इसके लिए तीन मार्च से 15 अगस्त तक विशेष तौर पर 'राष्ट्रीय मतदाता सूची शुद्धीकरण और सत्यापन कार्यक्रम' चलाएगा। पहले चरण में मतदाताओं से अपील की जाएगी कि वे स्वयं अपने विवरण जांच लें और सुनिश्चित करें कि एक से ज्यादा जगह पर उनके नाम नहीं हों। नाम हटाने के आवेदनों पर 15 दिन के अंदर ही कार्रवाई कर ली जाएगी।

इसके बाद अगर पाया गया कि कोई व्यक्ति जानबूझ कर एक से ज्यादा जगह पर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

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