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मुसलमानों को तलाक से रोकेंगे उलमाUpdated: Fri, 25 Nov 2016 10:54 PM (IST)

आला हजरत उर्स के दूसरे दिन इस्लामिया मैदान में हुई तहफ्फुज-ए-मुस्लिम पर्सनल लॉ और तहफ्फुज हुकूक-ए-मुस्लिम कांफ्रेंस में बड़ा फैसला हुआ।

बरेली। आला हजरत उर्स के दूसरे दिन इस्लामिया मैदान में हुई तहफ्फुज-ए-मुस्लिम पर्सनल लॉ और तहफ्फुज हुकूक-ए-मुस्लिम कांफ्रेंस में बड़ा फैसला हुआ। तय हुआ कि जिस तरह तलाक के मसले को दुनियाभर में बड़ा मुद्दा बना दिया है, उससे पार पाने की कोशिश होगी। मुसलमानों को तलाक से रोका जाएगा। बताया जाएगा कि अल्लाह के नजदीक यह हलाल कामों में सबसे खराब चीज है। सहमति बनी कि उलमा अपनी तकरीर तलाक से शुरू करके तालीम पर खत्म किया करेंगे।

कांफ्रेंस में मुख्तार अहमद बहेड़वी ने कहा कि तलाक के बढ़ते वाकियात खतरनाक सूरत में सामने आए हैं। जिस तरह तलाक के छोटे-छोटे वाकियात मीडिया की सुर्खियां बन रहे हैं, उनकी रोकथाम जरूरी है। ऐसा तभी हो सकता है, जब मुसलमानों में जागरूकता पैदा की जाए। उन्हें बताया जाए कि तलाक को इस्लाम में अच्छी चीज नहीं माना गया है। इसके लिए उलमा को आगे आना होगा। मौलाना सगीर अहमद ने कहा कि एकजुट होकर कोशिश करना होंगी।

हाई कोर्ट के अधिवक्ता सय्यद महमूद ने कहा कि तीन तलाक के नाम पर शरीयते इस्लामिया में हस्तक्षेप संविधान में दिए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरुद्ध है। इदरीस अहमद एडवोकेट ने कहा कि शरीयत में संशोधन की साजिश को नाकाम करने के लिए हमें मुसलमानों को बताना होगा कि तलाक का सही तरीका क्या है? उर्स प्रभारी सय्यद आसिफ मियां एडवोकेट ने कहा कि मामूली सी बात पर तलाक देकर बीवी से अलग हो जाना कोई अच्छी बात नहीं। अल्लाह के नजदीक तलाक हलाल चीजों में सबसे ज्यादा नापसंद मानी गयी है।

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