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कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग नहीं : फारूकUpdated: Wed, 16 Nov 2016 10:23 PM (IST)

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने कभी कश्मीरियों पर यकीन नहीं किया और न कभी वह कश्मीर समस्या को स्वीकार करेगी।

श्रीनगर। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि कश्मीर न कभी भारत का अविभाज्य अंग था और न कभी होगा।

फारूक नवाए सुब परिसर में नेकां कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने कभी कश्मीरियों पर यकीन नहीं किया और न कभी वह कश्मीर समस्या को स्वीकार करेगी। जिस तरह नई दिल्ली को कश्मीर की हकीकत पूरी पता नहीं है, उसी तरह यहां जो लोग आजादी का नारा लगाते हैं उन्हें भी पता नहीं कि आखिर यह आजादी है क्या। हमारी नौजवान पीढ़ी को अच्छी तरह मालूम है कि दिल्ली ने कश्मीर के साथ क्या किया है, इसलिए वह आज आजादी के लिए सड़कों पर है।

राज्य के लिए स्वायत्तता का जिक्र करते हुए फारूक ने कहा कि 2000 में राज्य विधानसभा ने एकमत होकर राज्य में 1953 से पूर्व की संवैधानिक स्थिति बहाली का प्रस्ताव पारित किया, लेकिन उस प्रस्ताव के साथ दिल्ली ने क्या सुलूक किया यह बताने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई जाति दुश्मनी नहीं है, लेकिन मैं उनके खिलाफ हूं क्योंकि मोदी और उनकी पार्टी अनुच्छेद 370 को समाप्त करना चाहती है ताकि कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण विलय हो, लेकिन यह नेकां के रहने तक संभव नहीं है।

हम किसी को अपने अधिकारों से खिलवाड़ करने या उन्हें छीनने का मौका नहीं देंगे। संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान का उल्लेख करते हुए फारूक ने कहा कि उन्होंने संविधान के खिलाफ बात की है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। संविधान के मुताबिक भारत एक हिदू राष्ट्र नहीं बल्कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। अगर वह इसे हिदू राष्ट्र कहते हैं तो भारतीय संविधान के खिलाफ बोल रहे हैं और इसके लिए केंद्र को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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