कोहिनूर हीरे को वापस लाने की मुहिम से पीछे हटा भारतUpdated: Sun, 07 Feb 2016 12:39 AM (IST)

कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन से वापस भारत लाने की मुहिम से सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए हैं।

अरविंद पांडेय नई दिल्ली। कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन से वापस भारत लाने की मुहिम से सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग (एएसआई ) ने आरटीआई आवेदन के जवाब में यह जानकारी दी है। एएसआई का कहना है कि सरकार का कोहिनूर को वापस लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

एएसआई ने जवाब में यह भी साफ किया है कि यूनेस्को कन्वेंशन के तहत स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले जो चीजें विदेशों में चली गईं हैं, उन्हें अब वापस लाना संभव नहीं है। एएसआई की ओर से यह जवाब अधीक्षण पुरातत्वविद सुनंदा श्रीवास्तव ने दिया है।

उन्होंने यह भी बताया है कि पुरातत्व और बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 के तहत कोहिनूर हीरे को वापस भारत लाने के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई करना संभव नहीं है। आजादी के बाद से ही भारत के बड़े वर्ग की मांग रही है कि कोहिनूर को भारत वापस लाया जाए।

दो बार हो चुकी है कोशिश

कोहिनूर हीरे को इंग्लैड से वापस लाने को लेकर सरकार की ओर से दो बार अधिकारिक तौर पर पहल की जा चुकी है। पहली कोशिश देश की आजादी के तुरंत बाद 1947 में की गई थी। दूसरी पहल 1953 में की गई थी। दोनों ही बार इंग्लैंड ने भारत के दावे को खारिज कर दिया।

पीएमओ से मांगी गई थी जानकारी

कोहिनूर को वापस लाने के संदर्भ में सरकार की मौजूदा कोशिशों को लेकर सतना निवासी राजीव कुमार खरे ने 5 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी। इसे वहां से बाद में जवाब देने के लिए एएसआई के पास भेज दिया गया। इसके बाद एएसआई ने इस मामले पर पूरी स्थिति साफ की है।

क्या खासियत है इस हीरे में

कोहिनूर हीरे को दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा हीरा (करीब 793 कैरेट) माना जाता है। दस्तावेजों के मुताबिक यह आंध्र प्रदेश की खानों से करीब तीन हजार साल पहले मिला था। बाद में यह मुगल बादशाहों के पास आ गया। मौजूदा समय में यह इंग्लैंड में है। इसके अब कई हिस्से भी कर दिए गए हैं। इनमें से ही एक हिस्सा इंग्लैंड की महारानी के मुकुट में जड़ा है।

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